§1यह बिज़नेस क्या है

बाँस के खंभों को साफ़ करके बेलनों में काटा जाता है, पट्टियों में चीरा जाता है, बराबर मोटाई की पतली पट्टियाँ बनाई जाती हैं, गोल तीलियाँ बनाकर पॉलिश, नाप से कटाई, सुखाई, छँटाई करके 1 किलो के बंडलों में पैक किया जाता है। तीलियाँ अगरबत्ती बनाने वाले ख़रीदते हैं; रिपोर्ट के अनुसार उनकी बड़ी ज़रूरत अभी चीन और वियतनाम से आयात से पूरी होती है।

क्षमता: रोज़ 300 किलो तीलियाँ, साल में 90,000 किलो; योजना पहले साल 60% और पाँचवें साल 80% पर चलती है। विवरण के अनुसार बारिश के कारण काम साल में सिर्फ़ 9 महीने चल सकता है।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

बाँस के जंगलों या बागानों के पास रहने वाला जिसके अगरबत्ती बनाने वालों से संपर्क हों।

किसके लिए नहीं

जिसके पास बाँस की पक्की आपूर्ति या पहले से ख़रीदार नहीं हैं।

फ़ायदे

  • अगरबत्ती बनाने वालों को तीलियों की लगातार ज़रूरत है; रिपोर्ट के अनुसार भारत का अगरबत्ती बाज़ार लगभग ₹6,000 करोड़ है
  • मशीन से बनी गोल तीलियाँ आयातित तीलियों की जगह ले सकती हैं
  • स्थानीय कामगार हाथ से तीली बनाना पहले से जानते हैं
  • कचरा (लगभग 40%) ड्रायर का ईंधन बन सकता है या कोयला इकाइयों को जा सकता है

नुकसान

  • ऊँचा ब्रेक-ईवन (51%)
  • चीन और वियतनाम से कड़ा मुक़ाबला
  • बाँस में फूल आने से कच्चे माल की कमी हो सकती है
  • धंधे पर व्यापारियों का क़ब्ज़ा, इसलिए तीली बनाने वाले का मोलभाव कमज़ोर

कौन-से हुनर चाहिए

  • पतली पट्टी, गोल तीली और पॉलिश मशीनें चलाना
  • तीलियों की नाप से छँटाई
  • इकट्ठा करने वालों और उगाने वालों से बाँस लेना
  • अगरबत्ती इकाइयों को बिक्री

कठिनाई 3/5 क्यों: मशीनें सीधी हैं; ऊँचा ब्रेक-ईवन, आयात से मुक़ाबला और मौसमी आपूर्ति इसे कठिन बनाते हैं।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • अगरबत्ती बनाने वाले, कुटीर इकाइयों से लेकर FMCG कंपनियों तक

कैसे बिकता है

  • 1 किलो के बंडलों में सीधी आपूर्ति
  • ई-कॉमर्स और ढुलाई साझेदारी, व्यापार मेले (रिपोर्ट की रणनीति)

जानने लायक

  • रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की 70% से ज़्यादा अगरबत्ती खपत भारत में होती है और भारत का अगरबत्ती बाज़ार लगभग ₹6,000 करोड़ है, जिसमें ₹2,000 करोड़ संगठित है।
  • रिपोर्ट के अनुसार आयात शुल्क 30% से 10% होने के बाद उद्योग की लगभग 70% तीली ज़रूरत चीन और वियतनाम के आयात से पूरी होती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत ने FY2012 से FY2016 के बीच USD 49.802 करोड़ की अगरबत्ती निर्यात की।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
बाँस को आड़ा काटने की मशीन——
हाथ से चलने वाली बाँस चीरने की मशीन——
भारी पतली पट्टी (स्लिवर) बनाने की मशीन——
गोल तीली मशीन——
तीली पॉलिश मशीन——
तीली नाप से काटने की मशीन——
ड्रायर (या खुली हवा में सुखाई)——
कुल प्लांट और मशीनरी (रिपोर्ट के अनुसार मशीनें चीन या वियतनाम से आती हैं; अलग-अलग दाम नहीं छपे)—₹11.04 lakh

स्रोत: PMEGP sample project report — Bamboo Sticks Production Unit (prepared by Udyami/Samadhan)

  • बाँस के खंभे (लगभग 6 किलो प्रति खंभा)साल में 30,000 खंभे (महीने में 2,500), ₹100 प्रति खंभा — पूरी क्षमता पर साल में ₹30.00 लाख
  • आम प्रजातियाँमुली (मेलोकाना बैक्सीफ़ेरा), बारी, मृतिंगा, बराक और रुपाई बाँस

स्रोत: PMEGP sample project report — Bamboo Sticks Production Unit (prepared by Udyami/Samadhan)

Building Business Bazaar में सप्लायर

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§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  2. GST पंजीकरण
  3. जहाँ राज्य माँगे वहाँ बाँस के लिए वन ढुलाई परमिट
  4. स्थानीय निकाय से व्यापार लाइसेंस

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

PMEGP (रिपोर्ट इसी के लिए बनी है), ₹20 लाख तक MUDRA और बिना गारंटी कर्ज़ के लिए CGTMSE। रिपोर्ट राष्ट्रीय बाँस मिशन के तहत मदद का भी ज़िक्र करती है।

§7पैसा

निवेश का आधार: प्लांट और मशीनरी ₹11.04 लाख + फ़र्नीचर ₹1.18 लाख + कार्यशील पूँजी ₹5.55 लाख = ₹17.77 लाख; ज़मीन और 2,000 वर्ग फ़ुट का शेड अपना या किराए का।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): प्रोजेक्ट लागत में कार्यशील पूँजी ₹5.55 लाख (बैंक से ₹5.00 लाख): 20 दिन के खंभे और 10 दिन की तैयार तीलियाँ।

रिपोर्ट पर साल नहीं छपा है — मशीनों और कच्चे माल के आज के दाम पता करें।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

प्रोजेक्ट रिपोर्ट में HS कोड नहीं छपा है; निर्यात से पहले DGFT की वेबसाइट या कस्टम ब्रोकर से 8 अंकों वाली ITC(HS) लाइन पता करें।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • आयात से मुक़ाबला और नीति बदलाव
  • बाँस में फूल आने के बाद कच्चे माल की कमी
  • बारिश के मौसम में क्षमता का कम इस्तेमाल
  • मशीनों का घिसना और ख़राबी

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: अगरबत्ती के लिए बाँस की तीलियाँ की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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स्रोत

  1. PMEGP sample project report — Bamboo Sticks Production Unit (prepared by Udyami/Samadhan)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।