§1यह बिज़नेस क्या है

चौथाई से आधे एकड़ पर — खुले खेत और एक छोटे नेट हाउस या पॉलीहाउस में — पूजा के काम आने वाले फूल उगाए जाते हैं, उनकी मालाएँ गूँथी जाती हैं, खुले फूल तौल से मंदिरों और पूजा-सामग्री विक्रेताओं को बेचे जाते हैं और शादियों व आयोजनों के ऑर्डर लिए जाते हैं। उत्तराखंड में मालाओं का बड़ा हिस्सा अभी मैदानों (हरिद्वार, मेरठ, हल्द्वानी) से आता है, इसलिए मंदिर वाले क़स्बों और चारधाम मार्ग के पास ताज़ा स्थानीय मालाओं की जगह है। माला गूँथने का काम स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ कर सकती हैं।

क्षमता: साल में 20,000–30,000 मालाएँ (15,000–20,000 गेंदे की, 5,000–8,000 गुलाब या चमेली की) और 1,000–1,500 किलो खुले फूल।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

मंदिर वाले क़स्बे या तीर्थ मार्ग के पास रहने वाला किसान परिवार या महिलाओं का स्वयं सहायता समूह।

किसके लिए नहीं

मंदिरों और बाज़ार से दूर रहने वाला — ताज़ी मालाएँ दूर नहीं भेजी जा सकतीं।

फ़ायदे

  • मंदिरों, आश्रमों और यात्रा के मौसम से रोज़ की माँग
  • स्थानीय मालाएँ मैदानों से ट्रक में आई मालाओं से ज़्यादा ताज़ा होती हैं
  • ज़्यादातर हाथ के औज़ार — मशीनें कम ख़रीदनी पड़ती हैं
  • स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए घर के पास अच्छा काम

नुकसान

  • ताज़ी माला एक-दो दिन ही चलती है — न बिका माल बेकार
  • भीड़ के मौसम में मैदानों के सप्लायर दाम गिरा देते हैं
  • ओले, पाला या कीड़े फ़सल बिगाड़ सकते हैं
  • आमदनी त्योहारों के हिसाब से घटती-बढ़ती है

कौन-से हुनर चाहिए

  • फूल उगाना और जैविक तरीक़े से कीट रोकना
  • तेज़ और साफ़ माला गूँथना
  • नवरात्रि, दिवाली और यात्रा के मौसम के हिसाब से तुड़ाई की योजना
  • मंदिरों और सामग्री विक्रेताओं से नियमित ऑर्डर लेना

कठिनाई 2/5 क्यों: औज़ार और हुनर आसान हैं, पर जल्दी ख़राब होने वाले माल को रोज़ बेचना और सोच-समझकर योजना बनाना पड़ता है।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • मंदिर, मंदिर ट्रस्ट और मठ
  • पूजा-सामग्री विक्रेता और फूल वाले
  • आश्रम, योग विद्यालय, वेलनेस रिज़ॉर्ट और होटल
  • शादी और आयोजन करवाने वाले

कैसे बिकता है

  • मंदिरों और धर्मशालाओं के साथ नियमित आपूर्ति के अनुबंध
  • चारधाम मेलों, योग उत्सवों और उद्यान मेलों में स्टॉल
  • थोक ऑर्डर के लिए WhatsApp कैटलॉग; सूखी माला के उपहार के लिए ऑनलाइन लिस्टिंग

जानने लायक

  • प्रोफ़ाइल में गेंदे की माला ₹10–20 और गुलाब या चमेली की माला ₹30–80 में बिकती है।
  • खुले फूल ₹30–60 किलो बिकते हैं।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
ढाँचा: बाड़, नेट हाउस, खाद गड्ढा, भंडार, सिंचाई व्यवस्था और काम का शेड—₹2,50,000–3,00,000
बीज या पौध, छिड़काव, औज़ार और खाद—₹2,00,000–2,25,000
गुलाब और मोगरे के लिए नेट हाउस या पॉलीहाउस300–500 sq ft—
काम का शेड, बाँस या टीन की छत10 ft × 15 ft—
हाथ के औज़ार: कैंची, छँटाई के चाकू, निराई के औज़ार, टोकरियाँ, सुइयाँ, धागे के डिस्पेंसर——
पानी की टंकी या ड्रिप, पाइप, कैन और स्प्रेयर——
वैकल्पिक: पैडल से चलने वाला माला रोलर, ठंडे डिब्बे, सोलर ड्रायर——

स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Floriculture for Devotional Garlands in Uttarakhand

  • गेंदा, गुलाब, चमेली और रजनीगंधा के बीज या पौधस्थानीय नर्सरी या प्रमाणित विक्रेताओं से
  • खाद, गोबर, नीम का छिड़काव और लकड़ी की राखजैविक खेती के लिए
  • सुई, धागे, रंगीन धागे, मोती और रुद्राक्षमाला गूँथने और सजाने के लिए
  • कपड़े के लपेटन, जूट की सुतली, केले के पत्ते और लकड़ी के क्रेटढुलाई में माला ताज़ा रखने के लिए

स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Floriculture for Devotional Garlands in Uttarakhand

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  2. दुकान या ठेले के लिए स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस
  3. कर वाला सामान बेचें तो GST पंजीकरण (ताज़े फूल आम तौर पर कर-मुक्त हैं — कर सलाहकार से पक्का करें)

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

प्रोफ़ाइल फूलों की खेती के लिए DUY या MIDH से 20–40% पूँजी अनुदान और ₹6–7 लाख के बैंक कर्ज़ पर चलती है। इस आकार के कर्ज़ के लिए MUDRA ठीक है; PMEGP माला बनाने वाले हिस्से को प्रसंस्करण मानकर पैसा दे सकता है (खेती अपने आप में शामिल नहीं); CGTMSE बिना गिरवी कर्ज़ की गारंटी देता है।

§7पैसा

निवेश का आधार: ढाँचा (शेड, बाड़, नेट हाउस) ₹2.50–3.00 लाख + बीज, खाद-दवा और औज़ार ₹2.00–2.25 लाख + पहले साल की कार्यशील पूँजी ₹4.50–5.50 लाख + आकस्मिक ख़र्च ₹0.50 लाख = ₹9.50–11.25 लाख, ज़मीन के बिना। पैसे का इंतज़ाम: प्रवर्तक ₹2.0–2.5 लाख, बैंक ₹6–7 लाख, DUY/MIDH अनुदान ₹1.5–2.0 लाख।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): पहले साल के लिए ₹4.50–5.50 लाख — मज़दूरी, खाद-बीज, पैकिंग, ढुलाई और प्रचार।

प्रोफ़ाइल पर साल नहीं छपा है — आज के दाम पता करें।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात परिषद / बोर्ड: APEDA

  • ताज़ी मालाएँ स्थानीय रूप से बिकती हैं; प्रोफ़ाइल सूखे फूलों के निर्यात को बाद का विकल्प बताती है — पहले DGFT से ITC(HS) लाइन पक्की करें।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • कम टिकाऊपन और माल की बर्बादी
  • ओले, पाला या भारी बारिश
  • भीड़ के मौसम में मैदानों से दाम की होड़
  • कुछ ही थोक ख़रीदारों पर निर्भरता

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: पूजा की मालाओं के लिए फूलों की खेती की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, दुकान या ठेले के लिए स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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स्रोत

  1. Uttarakhand DUY project profile — Floriculture for Devotional Garlands in Uttarakhand

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।