§1यह बिज़नेस क्या है
पके आम धोकर छाँटे जाते हैं, स्क्रू फ़ीडर से क्रशर में डाले जाते हैं, गूदा इकट्ठा करके भाप जैकेट वाली केतली में गरम किया जाता है, ट्विन पल्पर से निकाला जाता है और पैकिंग के लिए भरा जाता है। अल्फ़ांसो, तोतापुरी और केसर किस्मों का पल्प जूस और पेय बनाने वालों, आइसक्रीम और डेयरी इकाइयों, मिठाई निर्माताओं, होटलों और निर्यातकों को जाता है। प्लांट मुख्य रूप से आम के मौसम में चलता है।
क्षमता: प्रति घंटा 300 किलो आम (5% बर्बादी के बाद 285 किलो); पूरी क्षमता पर साल में 5,47,200 किलो पल्प; पहले साल 50% पर 2,73,600 किलो।
§2क्या यह आपके लिए है?
किसके लिए
आम क्षेत्र का कृषि-प्रोसेसर या आम व्यापारी, जिसके जूस और डेयरी कारोबार में ख़रीदार तय हों।
किसके लिए नहीं
जिसके पास मौसमी कार्यशील पूँजी या ठंडे/एसेप्टिक भंडारण की योजना न हो।
फ़ायदे
- जूस, डेयरी और मिठाई निर्माताओं से मज़बूत माँग
- भारतीय आम पल्प का बड़ा निर्यात बाज़ार
- रिपोर्ट में अच्छा मुनाफ़ा
- बेमौसम अमरूद, पपीता या टमाटर भी प्रोसेस हो सकते हैं
नुकसान
- ₹57.10 लाख की लागत PMEGP की ₹50 लाख सीमा से ज़्यादा
- आम का छोटा मौसम; बाक़ी समय प्लांट ख़ाली
- बहुत बड़ी कार्यशील पूँजी
- लंबे भंडारण के लिए कड़ी स्वच्छता और एसेप्टिक या डिब्बाबंद पैकिंग
कौन-से हुनर चाहिए
- आम की ख़रीद और पकाना
- गरम करके प्रोसेसिंग और स्वच्छता
- पैकिंग (डिब्बे या एसेप्टिक बैग)
- उद्योगों और निर्यात में बिक्री
कठिनाई 4/5 क्यों: मौसमी काम, भारी कार्यशील पूँजी और खाद्य सुरक्षा की माँग।
§3बाज़ार
कौन ख़रीदता है
- जूस, पेय और नेक्टर बनाने वाले
- आइसक्रीम और डेयरी इकाइयाँ (मिल्कशेक)
- जैम और मिठाई बनाने वाले
- होटल और कैटरर
- निर्यातक
कैसे बिकता है
- उद्योगों को सीधी सप्लाई
- व्यापारी निर्यातकों के ज़रिए निर्यात
- खाद्य सेवा वितरक
जानने लायक
- रिपोर्ट के अनुसार 2017 में दुनिया का आम प्यूरी बाज़ार $995 मिलियन था, जो हर साल लगभग 8.7% बढ़कर 2026 तक $2,110 मिलियन होगा।
- रिपोर्ट कड़ी आयात नीतियों (ख़ासकर अमेरिका में) को रुकावट बताती है।
§4कच्चा माल और मशीनें
| सामान | संख्या | लागत |
|---|---|---|
| फल धोने की मशीन | 1 | ₹4,86,000 |
| छँटाई कन्वेयर | 1 | ₹1,80,000 |
| काम की मेज़ | 1 | ₹1,12,500 |
| स्क्रू फ़ीडर | 1 | ₹2,70,000 |
| फल क्रशर | 1 | ₹36,000 |
| गूदा इकट्ठा करने का टैंक | 1 | ₹36,000 |
| ट्रांसफ़र पंप | 1 | ₹81,000 |
| भाप जैकेट वाली केतली | 1 | ₹90,000 |
| ट्विन पल्पर | 1 | ₹2,25,000 |
| भरने का टैंक | 1 | ₹75,000 |
| भाप बॉयलर | 1 | ₹6,30,000 |
स्रोत: PMEGP sample project report — Mango Pulp (prepared by Udyami/Samadhan)
- पके आम (अल्फ़ांसो, तोतापुरी, केसर)₹50–60 प्रति किलो; पूरी क्षमता पर साल में 5,76,000 किलो
- पैकिंग (डिब्बे या एसेप्टिक बैग)पहले साल पैकिंग ₹6.37 लाख
स्रोत: PMEGP sample project report — Mango Pulp (prepared by Udyami/Samadhan)
Building Business Bazaar में सप्लायर
कच्चे माल के डेटाबेस में
§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
- FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण (टर्नओवर के अनुसार)
- उद्यम (Udyam) पंजीकरण
- GST
- ज़रूरत के अनुसार फ़ायर/प्रदूषण पंजीकरण (रिपोर्ट में लिखा है)
- बॉयलर अधिनियम के तहत बॉयलर पंजीकरण
- ट्रेडमार्क (वैकल्पिक)
§6योजनाएँ और सब्सिडी
- PMEGPCentralचालू15–35% सब्सिडी
- PMFMECentralअस्पष्ट35% सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख
- CGTMSECentralचालूबिना कोलैटरल, ₹10 करोड़ तक
- Stand-Up IndiaCentralबंद₹10 लाख – ₹1 करोड़ कर्ज़
- AIFCentralअस्पष्ट3% ब्याज छूट, ₹2 करोड़ तक
विनिर्माण में PMEGP केवल ₹50 लाख तक की लागत गिनता है, इसलिए ₹57.10 लाख वाले इस मॉडल को छोटा करना होगा या दूसरा कर्ज़ लेना होगा; PMFME (35%, ₹10 लाख तक), CGTMSE, Stand-Up India, और फ़सल-कटाई के बाद की प्रोसेसिंग मानी जाए तो AIF की ब्याज छूट।
§7पैसा
निवेश का आधार: समाधान रिपोर्ट: प्लांट और मशीनरी ₹26.22 लाख, दफ़्तर का फ़र्नीचर ₹5.00 लाख, कार्यशील पूँजी ₹25.88 लाख = ₹57.10 लाख। टर्म लोन ₹26.54 लाख और कार्यशील पूँजी सीमा ₹22.00 लाख। मशीन सूची का जोड़ ₹22.21 लाख (GST के बिना)।
चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): ₹50–60 प्रति किलो के आम (पहले साल ₹158.40 लाख) छोटे मौसम में ख़रीदने पड़ते हैं — कार्यशील पूँजी ₹25.88 लाख (बैंक ₹22.00 लाख)।
रिपोर्ट पर वर्ष छपा नहीं है — मशीनों के आज के दाम पता करें।
§8निर्यात की संभावना
निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें
निर्यात परिषद / बोर्ड: APEDA
- प्रोसेसिंग के अनुसार आम पल्प शीर्ष 2008 में भी आ सकता है — 8 अंकों की लाइन पक्की करें।
- 8 अंकों वाली ITC(HS) लाइन DGFT या अपने कस्टम ब्रोकर से पक्की करें।
- पहली खेप भेजने से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।
§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं
- आम की ख़राब फ़सल और दामों में उछाल
- कमज़ोर प्रोसेसिंग से माल ख़राब होना
- माल न बिकना
- थोक ख़रीदारों से भुगतान में देरी
§1030 / 60 / 90 दिन की योजना
यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।
- दिन 1–30: आम का पल्प बनाना की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
- दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण (टर्नओवर के अनुसार), उद्यम (Udyam) पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
- दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।
§11किससे जुड़ें
एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें
§12देखें
इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।
आम का पल्प बनाना शुरू करना है?
DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।
¶स्रोत
डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
