§1यह बिज़नेस क्या है

काँस घास के चारों ओर मूँज लपेटकर कुंडली (कॉइल) बनाई जाती है और कुंडलियों को सिलकर टोकरी, थैले, पेन-स्टैंड, टेबल-मैट और दीवार का सजावटी सामान बनता है। कुछ घास को लाल या हरा रंगकर डिज़ाइन बनाया जाता है। यह साधारण औज़ारों वाला हाथ का काम है, जिसे ज़्यादातर प्रयागराज, अमेठी और सुल्तानपुर ज़िलों की महिलाएँ करती हैं। दिल्ली, वाराणसी और लखनऊ के व्यापारी ख़रीदते हैं और माल मुंबई, दिल्ली, बनारस और कानपुर जाता है।

क्षमता: सजावटी सामान: रोज़ 100 नग। टोकरी और थैले: रोज़ 30 नग। दोनों में पहले साल 50% क्षमता, 10 घंटे की पाली।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

पूर्वी यूपी के मूँज वाले इलाक़े का व्यक्ति, जो महिला कारीगरों को संगठित कर सके और शहर या ऑनलाइन ख़रीदार ढूँढ सके।

किसके लिए नहीं

जो मशीन से बड़े पैमाने का माल या जल्दी मुनाफ़ा चाहता हो।

फ़ायदे

  • मशीनों का ख़र्च बहुत कम — ज़्यादातर हाथ के औज़ार
  • पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद, उपहार और शादियों में माँग
  • गाँव की महिलाओं को घर बैठे काम
  • नदी किनारे की घास से स्थानीय कच्चा माल

नुकसान

  • हर नग हाथ से बनता है, इसलिए बड़े ऑर्डर पूरे करना मुश्किल
  • मज़दूरी मुख्य ख़र्च है; प्रति नग मुनाफ़ा कम
  • घास साल में एक बार थोक में ख़रीदनी पड़ती है
  • शहरों और निर्यात की बिक्री के लिए व्यापारियों पर निर्भरता

कौन-से हुनर चाहिए

  • लपेटने और सिलने की तकनीक
  • पक्के रंग से रँगाई
  • घर से काम करने वाले कारीगरों को संगठित करना और भुगतान करना
  • शहरी और उपहार ख़रीदारों के लिए डिज़ाइन

कठिनाई 2/5 क्यों: औज़ार सस्ते हैं, पर कारीगरों को संभालना और ख़रीदार ढूँढना मेहनत का काम है।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • दिल्ली, वाराणसी और लखनऊ के व्यापारी
  • शहरी ग्राहक और उपहार ख़रीदार
  • शादी और रस्मों के लिए ख़रीदने वाले परिवार

कैसे बिकता है

  • स्थानीय व्यापारी जो शादी और त्योहार से पहले अग्रिम ऑर्डर देते हैं
  • बड़े शहरों (मुंबई, नई दिल्ली, बनारस, कानपुर) के बाज़ारों में आपूर्ति
  • कारीगरों को ख़रीदारों से जोड़ने वाले शिल्प प्लेटफ़ॉर्म

जानने लायक

  • शादी और त्योहार के मौसम में व्यापारी अग्रिम ऑर्डर देते हैं।
  • हर नग अलग होता है, इसलिए बड़े ऑर्डर मुश्किल हैं।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
हाथ के औज़ार: कैंची, सिरही (लकड़ी के हत्थे वाली सुई), भिगोने के प्लास्टिक टब, रँगाई के एल्युमिनियम बर्तन, हिलाने की लकड़ी, नापने का चम्मच, डिब्बे1 set₹20,000–22,000 (decorative-items report); ₹25,000–28,000 (baskets & bags report)

स्रोत: PMEGP sample project report — Monj Decorative Items (prepared by Udyami/Samadhan)

  • मूँज और काँस घाससाल में एक बार मेहवा और आसपास से थोक में; अक्टूबर सबसे अच्छा महीना
  • कच्चा रंग (रंग का पाउडर)स्थानीय बाज़ार में मिलता है
  • खाने का नमकरंग के घोल में डाला जाता है ताकि रंग टिके
  • प्रति नग कच्चे माल की लागतसजावटी सामान ₹120–150; थैला ₹800–900; टोकरी ₹400–500

स्रोत: PMEGP sample project report — Monj Decorative Items (prepared by Udyami/Samadhan) · PMEGP sample project report — Moonj Baskets & Bags (prepared by Udyami/Samadhan)

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam)
  2. GST
  3. विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) का कारीगर पहचान पत्र (पहचान)
  4. स्थानीय निकाय का ट्रेड लाइसेंस

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

PMEGP (ये PMEGP की नमूना रिपोर्टें हैं), MUDRA (बैंक वित्त ₹20 लाख से कम) और CGTMSE लागू।

§7पैसा

निवेश का आधार: PMEGP की दो नमूना रिपोर्टें। सजावटी सामान ₹9.13 लाख = शेड (1,000 वर्ग फ़ुट) ₹5.00 लाख + फ़र्नीचर ₹0.80 लाख + कार्यशील पूँजी ₹3.33 लाख। टोकरी और थैले ₹11.16 लाख = शेड ₹5.00 लाख + फ़र्नीचर ₹0.60 लाख + कार्यशील पूँजी ₹5.56 लाख। ज़मीन अपनी या किराए की; हाथ के औज़ार ₹20,000–28,000 अलग।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): घास साल में एक बार थोक में ख़रीदी जाती है (अक्टूबर सबसे अच्छा महीना), इसलिए पैसा महीनों स्टॉक में फँसा रहता है। कार्यशील पूँजी ₹3.33 लाख (सजावटी) और ₹5.56 लाख (टोकरी और थैले)।

रिपोर्ट पर वर्ष छपा नहीं है — मशीनों के आज के दाम जाँच लें।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें

4602बुनने वाली सामग्री से बनी टोकरियाँ और अन्य सामान

निर्यात परिषद / बोर्ड: EPCH

  • हस्तशिल्प का निर्यात हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH) के ज़रिए होता है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • अलग-अलग कारीगरों की गुणवत्ता में फ़र्क़
  • शादी और त्योहार के समय ऑर्डर में देरी
  • सस्ते प्लास्टिक के नक़ली सामान
  • नमी से घास का स्टॉक ख़राब होना

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: मूँज घास की टोकरियाँ, थैले और सजावटी सामान की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam), GST), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

मूँज घास की टोकरियाँ, थैले और सजावटी सामान शुरू करना है?

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स्रोत

  1. PMEGP sample project report — Monj Decorative Items (prepared by Udyami/Samadhan)
  2. PMEGP sample project report — Moonj Baskets & Bags (prepared by Udyami/Samadhan)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।