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खंड 03

बैंक आपके कर्ज़ को कैसे देखता है

बैंक कर्ज़ को पाँच बातों (5 C) पर परखते हैं, इस पर कि आपकी नकदी से किस्तें निकलेंगी या नहीं (DSCR), और ज़मानत पर। RBI के नियम के अनुसार अब सूक्ष्म और लघु उद्यमों के ₹20 लाख तक के कर्ज़ पर गिरवी नहीं ली जा सकती।

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01 पाँच C

दुनिया भर में कर्ज़ देने वाले यही पाँच सवाल पूछते हैं। शाखा जाने से पहले हर सवाल का जवाब तैयार रखिए।

  • चरित्र (Character): आपका कर्ज़ चुकाने का इतिहास और क्रेडिट स्कोर, और क्या आप बैंक से ईमानदार हैं।
  • क्षमता (Capacity): क्या व्यापार किस्तें चुकाने लायक़ नकदी कमाता है।
  • पूंजी (Capital): आप अपना कितना पैसा लगा रहे हैं।
  • गिरवी (Collateral): संपत्ति या जमा जिस पर बैंक भरोसा कर सके, जहाँ नियम इसकी इजाज़त दें।
  • हालात (Conditions): आपके बाज़ार की हालत, कर्ज़ का मक़सद और शर्तें।

02 DSCR: क्या आपकी नकदी किस्तें चुका सकती है?

DSCR (कर्ज़ चुकाने की क्षमता का अनुपात) = (शुद्ध मुनाफ़ा + घिसावट + टर्म लोन का ब्याज) ÷ (मूल रक़म की किस्त + टर्म लोन का ब्याज), कर्ज़ के हर साल के लिए अलग।

DSCR 1 का मतलब है कि हर रुपया बैंक को जाता है, कुछ नहीं बचता। बहुत से बैंक औसत DSCR 1 से अच्छा-ख़ासा ऊपर, अक्सर लगभग 1.5, देखना चाहते हैं, पर हर बैंक अपना पैमाना ख़ुद तय करता है, इसलिए अपने बैंक से पूछिए।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): शुद्ध मुनाफ़ा ₹3,00,000 + घिसावट ₹1,00,000 + ब्याज ₹1,20,000 = ₹5,20,000 उपलब्ध। बैंक को देना है: मूल रक़म ₹2,00,000 + ब्याज ₹1,20,000 = ₹3,20,000। DSCR = ₹5,20,000 ÷ ₹3,20,000 = 1.63।

03 गिरवी: RBI का ₹20 लाख वाला नियम

MSME क्षेत्र को कर्ज़ पर RBI का मास्टर डायरेक्शन कहता है कि सूक्ष्म और लघु उद्यम (MSE) क्षेत्र की इकाइयों को ₹20 लाख तक के कर्ज़ पर बैंक गिरवी (कोलैटरल) नहीं ले सकते। यह बढ़ी हुई सीमा 1 अप्रैल 2026 से मंज़ूर या नवीनीकृत कर्ज़ों पर लागू है; पहले यह ₹10 लाख थी।

बैंकों को यह भी सलाह है कि PMEGP में पैसा पाने वाली सभी इकाइयों को ₹20 लाख तक बिना गिरवी कर्ज़ दें। अच्छे रिकॉर्ड और मज़बूत वित्तीय हालत वाली इकाई के लिए बैंक अपनी बोर्ड से मंज़ूर नीति के तहत यह सीमा ₹25 लाख तक बढ़ा सकता है।

इस नियम का लाभ लेने के लिए आपको MSE होना चाहिए, इसलिए पहले उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कीजिए। अगर शाखा ₹20 लाख या उससे कम के पात्र कर्ज़ पर गिरवी माँगे, तो उनसे वह नियम दिखाने को कहिए जिसके तहत वे माँग रहे हैं, और ज़रूरत हो तो बैंक की शिकायत इकाई तक बात ले जाइए।

04 CGTMSE: संपत्ति की जगह गारंटी

बड़े कर्ज़ों के लिए बैंक, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फ़ंड ट्रस्ट (CGTMSE) के तहत कर्ज़ को सुरक्षित कर सकते हैं। अगर कर्ज़दार नहीं चुकाता, तो ट्रस्ट बैंक का बड़ा हिस्सा भरता है, इसलिए बैंक को आपकी संपत्ति की ज़रूरत नहीं पड़ती। गारंटी की अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ प्रति कर्ज़दार है।

इसकी एक सालाना गारंटी फ़ीस होती है, जो बैंक आप पर डाल सकता है। गारंटी बैंक को बचाती है, आपको नहीं: पूरा कर्ज़ आपको ही चुकाना है।

  • साथ लाइए: उद्यम प्रमाणपत्र, DPR, KYC, 6 से 12 महीने के बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न अगर हों, मशीनों के कोटेशन।
  • आवेदन से पहले अपना क्रेडिट स्कोर देखिए और ग़लतियाँ ठीक करवाइए।
  • की फ़ैक्ट्स स्टेटमेंट (कर्ज़ की मुख्य शर्तों का पत्र) माँगिए और कर्ज़ की कुल लागत की तुलना कीजिए।
स्रोत (4)
  1. RBI Master Direction: Lending to Micro, Small & Medium Enterprises (MSME) Sector (updated 9 Feb 2026), para 4.1
  2. PIB release on the higher collateral-free limit for MSE loans
  3. CGTMSE Scheme Document CGS-I (updated as on 1 Apr 2025)
  4. Udyam Registration portal (Ministry of MSME)