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खंड 03

व्यापार का ढाँचा कैसे चुनें

एकल स्वामित्व, साझेदारी, LLP, वन पर्सन कंपनी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी: तुलना कीजिए कि कर्ज़ के लिए कौन ज़िम्मेदार है, चलाने में कितना खर्च है, और हर एक में कितनी काग़ज़ी कार्रवाई है।

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01 सबसे अहम सवाल: ज़िम्मेदारी

ज़िम्मेदारी का मतलब है कि व्यापार अपना कर्ज़ न चुका पाए तो कौन चुकाएगा। असीमित ज़िम्मेदारी में आपकी निजी बचत, घर और ज़मीन से भी व्यापार का कर्ज़ चुकाया जा सकता है। सीमित ज़िम्मेदारी में आमतौर पर आप सिर्फ़ वही खोते हैं जो आपने व्यापार में लगाया है।

सीमित ज़िम्मेदारी उन कर्ज़ों से नहीं बचाती जिनकी आपने निजी गारंटी दी है, न धोखाधड़ी से, और कई मामलों में न बकाया टैक्स से। बैंक अक्सर डायरेक्टरों और साझेदारों से निजी गारंटी पर दस्तख़त करवाते हैं।

02 पाँचों ढाँचों की तुलना

संक्षेप में तुलना यह है। खर्च को कम, मध्यम या ज़्यादा में दिखाया गया है, क्योंकि सरकारी फ़ीस बदलती रहती है और पेशेवरों की फ़ीस शहर के हिसाब से अलग होती है।

  • एकल स्वामित्व (प्रोप्राइटरशिप): एक मालिक; क़ानून की नज़र में आप और व्यापार एक ही हैं; असीमित ज़िम्मेदारी; सबसे कम खर्च; सबसे कम काग़ज़ी कार्रवाई। इसका सबूत GST, उद्यम या दुकान लाइसेंस जैसे पंजीकरण से बनता है।
  • साझेदारी फ़र्म: भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के तहत दो या ज़्यादा साझेदार, साझेदारी विलेख (डीड) के साथ; असीमित ज़िम्मेदारी, और हर साझेदार से फ़र्म का कर्ज़ वसूला जा सकता है; कम खर्च। राज्य के फ़र्म रजिस्ट्रार के पास फ़र्म का पंजीकरण करवाना अच्छा है, क्योंकि अपंजीकृत फ़र्म अपने अनुबंध लागू करवाने के लिए दूसरों पर मुक़दमा नहीं कर सकती।
  • लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP, सीमित देयता साझेदारी): LLP अधिनियम, 2008 के तहत कम से कम दो साझेदार; सीमित ज़िम्मेदारी; मध्यम खर्च; कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) में पंजीकरण, और हर साल वार्षिक रिटर्न और खातों का विवरण भरना ज़रूरी।
  • वन पर्सन कंपनी (OPC, एक व्यक्ति कंपनी): कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक मालिक, जो भारतीय नागरिक होना चाहिए; 1 अप्रैल 2021 से मालिक भारत में रहे या विदेश में, और चुकता पूंजी या टर्नओवर की कोई सीमा नहीं; सीमित ज़िम्मेदारी; मध्यम से ज़्यादा खर्च; कंपनी क़ानून की फ़ाइलिंग लागू।
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी: कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कम से कम दो डायरेक्टर और दो शेयरधारक, ज़्यादा से ज़्यादा 200 सदस्य; सीमित ज़िम्मेदारी; सबसे ज़्यादा खर्च और नियम-पालन, जिसमें हर साल का वैधानिक ऑडिट भी है; निवेशकों से हिस्सेदारी के बदले पैसा जुटाने के लिए सबसे आसान ढाँचा।

03 कैसे चुनें

अगर जोखिम छोटा है तो सरल ढाँचे से शुरू कीजिए: एकल स्वामित्व में सबसे कम खर्च में विचार परखा जा सकता है। बड़ा कर्ज़ लेने, बड़े अनुबंध करने, साझेदार जोड़ने या निवेश जुटाने की योजना हो, तब LLP या कंपनी में जाइए।

ढाँचा कोई भी हो, साझेदारों को पैसे, ज़िम्मेदारियों, मुनाफ़े के बँटवारे और अलग होने के तरीक़े पर लिखित समझौता ज़रूर करना चाहिए। साझेदारों के ज़्यादातर झगड़े वहीं शुरू होते हैं जहाँ कुछ लिखा नहीं गया।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): दो दोस्त बिना बैंक कर्ज़ के ₹5 लाख से टिफ़िन सेवा शुरू करते हैं। साफ़ डीड वाली पंजीकृत साझेदारी में खर्च कम रहता है। दो साल बाद वे बैंक कर्ज़ से ₹50 लाख की केंद्रीय रसोई की योजना बनाते हैं; तब LLP या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बदलने से उनका निजी जोखिम सीमित हो जाता है।

स्रोत (5)
  1. Ministry of Corporate Affairs (company and LLP registration)
  2. MCA: The Companies Act, 2013 (full text)
  3. PIB, 1 Feb 2021: MCA amends One Person Company rules
  4. MCA FAQ: One Person Company
  5. Udyam Registration portal (Ministry of MSME)