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खंड 03

छोटे व्यापार के लिए GST की बुनियादी बातें

GST पंजीकरण कब ज़रूरी है, कब आप बाहर रह सकते हैं, और छोटे व्यापारियों, निर्माताओं, रेस्टोरेंट और सेवा देने वालों के लिए कंपोज़िशन योजना कैसे काम करती है।

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01 पंजीकरण कब ज़रूरी है

GST पंजीकरण एक वित्त वर्ष के आपके कुल टर्नओवर पर निर्भर है: एक ही PAN पर पूरे भारत में हुई आपकी सारी बिक्री का जोड़। ये सीमाएँ CBIC (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड) तय करता है।

अगर आप सिर्फ़ सामान बेचते हैं, तो टर्नओवर ₹40 लाख से ऊपर जाते ही पंजीकरण ज़रूरी है। अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तराखंड में यह सीमा ₹20 लाख है।

अगर आप सेवाएँ देते हैं, तो टर्नओवर ₹20 लाख से ऊपर जाते ही पंजीकरण ज़रूरी है; मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड और त्रिपुरा में ₹10 लाख।

कुछ व्यापारों को टर्नओवर कितना भी हो, पंजीकरण कराना ही होता है, जैसे दूसरे राज्य में सामान बेचने वाले। 1 अक्टूबर 2023 से सीमा से कम टर्नओवर वाला सामान विक्रेता, जो सिर्फ़ अपने राज्य में बेचता है, पूरे पंजीकरण की जगह PAN पर GST नामांकन संख्या लेकर ई-कॉमर्स ऑपरेटर के ज़रिए बेच सकता है (अधिसूचना 34/2023-केंद्रीय कर)। ₹20 लाख तक टर्नओवर वाले सेवा देने वाले दूसरे राज्य या ई-कॉमर्स की बिक्री पर भी छूट में हैं। अपना मामला GST पोर्टल पर पक्का कीजिए; अधिसूचना से सीमाएँ बदल सकती हैं।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): आप मध्य प्रदेश में अचार बनाते हैं और साल में ₹30 लाख का, सिर्फ़ राज्य के अंदर बेचते हैं। यह सामान की ₹40 लाख की सीमा से कम है, इसलिए पंजीकरण आपकी मर्ज़ी है। पर अगर आपके ख़रीदार दुकानें और होटल हैं जिन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए GST बिल चाहिए, तो अपनी मर्ज़ी से पंजीकरण करवाने से ज़्यादा ऑर्डर मिल सकते हैं।

02 GST एक पंक्ति में

पंजीकृत व्यापार अपनी बिक्री पर GST वसूलता है, उसमें से अपनी ख़रीद पर पहले से दिया GST (इनपुट टैक्स क्रेडिट) घटाता है, और बाक़ी सरकार को भरता है। इसीलिए ख़रीदार पंजीकृत सप्लायर पसंद करते हैं: वे आपके बिल पर लगा GST वापस ले सकते हैं।

03 कंपोज़िशन योजना

छोटे व्यापार कंपोज़िशन योजना चुन सकते हैं: टर्नओवर पर कम, तय दर से टैक्स भरिए, कम रिटर्न भरिए, और बिल-दर-बिल मिलान से बचिए।

सामान के लिए यह योजना तब खुली है जब पिछले साल का टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक हो (अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड में ₹75 लाख)। दर व्यापारियों और निर्माताओं के लिए 1% और रेस्टोरेंट के लिए 5% है।

जो सेवा देने वाले मुख्य योजना के पात्र नहीं हैं, वे पिछले साल का टर्नओवर ₹50 लाख तक होने पर 6% वाली अलग कंपोज़िशन योजना चुन सकते हैं।

बदले में: आप ग्राहकों से GST नहीं वसूल सकते, इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले सकते, दूसरे राज्य में माल नहीं बेच सकते, और टैक्स बिल की जगह 'बिल ऑफ़ सप्लाई' देते हैं। कुछ निर्माताओं पर यह योजना लागू नहीं है।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): कंपोज़िशन योजना वाला एक किराना व्यापारी, जिसका टर्नओवर ₹80 लाख है, साल भर का 1% = ₹80,000 अपने मार्जिन से भरता है और कम रिटर्न भरता है। अगर उसके ज़्यादातर ख़रीदार ऐसे व्यापार होते जिन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट चाहिए, तो सामान्य योजना उसके लिए बेहतर हो सकती थी।

स्रोत (3)
  1. CBIC: GST - An Update (1 May 2019): registration thresholds and composition scheme
  2. CBIC: Frequently Asked Questions on Composition Levy
  3. GST Portal (registration and composition opt-in)