कहानी
बाँस बाज़ार के कारण बरेली को आम बोलचाल में बाँस बरेली कहा जाता है, और इसका बेंत और बाँस का फ़र्नीचर पूरे उत्तर भारत में बिकता है। सड़क किनारे की छोटी कार्यशालाओं में कारीगर बेंत और बाँस को मोड़कर, बाँधकर और बुनकर कुर्सियाँ, सोफ़े, चिक और टोकरियाँ बनाते हैं। बाँस उत्पाद बरेली के ODOP उत्पादों में हैं, और बरेली फ़र्नीचर को GI टैग मिला है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Bareilly Furnitureआवेदन संख्या GI Application No. 926; Registration No. 639GI Registry, IP India - Application 926: Bareilly Furniture
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- कैफ़े, रिसॉर्ट और घरों के लिए पर्यावरण-अनुकूल फ़र्नीचर
- सेवा के रूप में बाँस उपचार और सुखाना
- बेंत की सजावट और टोकरियों की ऑनलाइन बिक्री
- कारीगरों को उपचारित बेंत और बाँस सप्लाई करना
क्लस्टर की मुश्किलें
- कच्चा बेंत अक्सर दूर से (असम और दूसरे राज्यों से) आता है
- कीड़े और ख़राब उपचार से सामान की उम्र घटती है
- प्लास्टिक और धातु के फ़र्नीचर से प्रतिस्पर्धा
- भारी-भरकम सामान और ऊँचा ढुलाई ख़र्च
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
बाँस का फ़र्नीचर और कुर्सियाँ →बाँस के सामान और हस्तशिल्प →बेंत की टोकरी बनाना →प्लास्टिक केन (वायर) कुर्सियाँ →
