कहानी
यह शिल्प रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू किए गए ग्रामीण पुनर्निर्माण केंद्र श्रीनिकेतन में विकसित हुआ, जहाँ कारीगरों को सजावटी चमड़ा सामान बनाना सिखाया गया। इसकी पहचान बाटिक जैसे पैटर्न वाला उभरा और रंगा चमड़ा है। आज यह GI पंजीकृत शिल्प है, जिसे बोलपुर के आसपास छोटी इकाइयाँ और सहकारी समितियाँ बनाती हैं।
आँकड़ों में
शांतिनिकेतन चमड़ा सामान क्लस्टर में 90 चालू इकाइयाँ, ₹11 करोड़ का कारोबार, ₹3.5 करोड़ का निर्यात और 5,500 लोगों का रोज़गार था।
Brief Industrial Profile of Birbhum District, MSME-DI Kolkata, Ministry of MSME · 2012
GI टैग
- Santiniketan Leather Goodsआवेदन संख्या Application No. 104Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- GI टैग वाला चमड़ा सामान ऑनलाइन और संग्रहालय दुकानों में बेचें
- स्थानीय कारीगरों के साथ नए उत्पाद (लैपटॉप स्लीव, फ़ोन कवर) डिज़ाइन करें
- छोटी इकाइयों को रंग, चमड़ा और फिटिंग सप्लाई करें
क्लस्टर की मुश्किलें
- शांतिनिकेतन नाम से नकली उत्पाद
- चमड़े के बढ़ते दाम
- कमज़ोर ब्रांडिंग और विपणन
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
चमड़े के बैग बनाना →चमड़े का पर्स बनाना →लोक कला और कला दीर्घा का ऑनलाइन मार्केटप्लेस →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
