कहानी
19वीं सदी के मध्य में अंग्रेज़ बागान मालिकों ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों पर चाय लगाना शुरू किया, क्योंकि ठंडी ढलानें, धुंध और बारिश चीनी किस्म की चाय के लिए आदर्श थीं। खड़ी ढलानों पर बागान और वहीं फ़ैक्टरियाँ बनीं, और चाय नीलामी और निर्यात के लिए कलकत्ता भेजी जाती थी। 2004 में दार्जिलिंग चाय भारत के GI अधिनियम के तहत पंजीकृत पहला उत्पाद बनी, और अब केवल तय क्षेत्र के पंजीकृत बागानों की चाय ही इस नाम से बिक सकती है।
आँकड़ों में
हर साल लगभग 1 करोड़ किलोग्राम दार्जिलिंग चाय 17,500 हेक्टेयर में उगाई जाती है; यह चाय 87 बागानों से आती है।
Darjeeling — Tea Board of Indiaदार्जिलिंग चाय का सालाना उत्पादन लगभग 1 करोड़ किलोग्राम है।
Brief Industrial Profile of Darjeeling District, MSME-DI Kolkata, Ministry of MSME · 2012
GI टैग
- Darjeeling Tea (word & logo)आवेदन संख्या Application No. 1 & 2Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- चाय बोर्ड लाइसेंस लेकर प्रमाणित दार्जिलिंग चाय को अपने ब्रांड से ब्लेंड, पैक और ऑनलाइन बेचें
- चाय पर्यटन: चालू बागानों के पास होमस्टे और बागान भ्रमण
- बागानों को पैकिंग, कार्टन और खेती का सामान सप्लाई करें
- छोटे बागानों के लिए निर्यात विपणन सेवा
क्लस्टर की मुश्किलें
- पुरानी झाड़ियों और मौसम की मार से घटता उत्पादन
- सस्ती चाय को झूठे तौर पर दार्जिलिंग बताकर बेचना
- पहाड़ी बागानों में श्रमिक असंतोष और ऊँची लागत
- बरसात में भूस्खलन और खराब सड़कें
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
चाय ब्लेंडिंग और पैकिंग इकाई →ग्रीन टी प्रसंस्करण इकाई →जैविक ग्रीन और हर्बल चाय की खेती →होमस्टे (बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट) →कृषि-पर्यटन फ़ार्म →
