कहानी
दार्जिलिंग के बाद बागान मालिकों ने डुआर्स और तराई की जंगली तलहटी साफ़ करके चाय लगाई, जहाँ समतल ज़मीन और भारी बारिश से बड़े बागान बन सके। यह पट्टी मुख्य रूप से भारतीय बाज़ार के लिए CTC चाय बनाती है, जो कोलकाता और सिलीगुड़ी की नीलामी में बिकती है। अब बड़े बागानों के साथ छोटे उत्पादक भी बॉट-लीफ़ फ़ैक्टरियों को हरी पत्ती बेचते हैं।
आँकड़ों में
ज़िला प्रोफ़ाइल में डुआर्स और तराई की 54 चाय बागान इकाइयाँ ज़िले के बड़े उद्योगों में दर्ज हैं।
Brief Industrial Profile of Jalpaiguri District, MSME-DI Kolkata, Ministry of MSME · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- छोटे उत्पादकों से पत्ती खरीदने वाली बॉट-लीफ़ फ़ैक्टरी लगाएँ
- क्षेत्रीय ब्रांडों के लिए चाय ब्लेंडिंग और पैकिंग
- बागानों को खाद, छँटाई के औज़ार और परिवहन सप्लाई करें
क्लस्टर की मुश्किलें
- CTC चाय के नीलामी दाम कम
- बंद और बीमार बागान, मज़दूर कल्याण की समस्या
- हाथियों के रास्ते और बाढ़
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
चाय ब्लेंडिंग और पैकिंग इकाई →चाय की दुकान (टी स्टॉल) →मसाला चाय (चाय मसाला) यूनिट →
