यह क्या है
खेती-वानिकी और वन से बाहर के पेड़ों के लट्ठे, जो आरा मिल, प्लाईवुड, फ़र्नीचर, पैकिंग पेटी और लुगदी इकाइयों को जाते हैं। भारत में ज़्यादातर लकड़ी-आधारित उद्योग अब इसी पर चलता है, जंगल की लकड़ी पर नहीं।
मोटाई वर्ग और लंबाई के अनुसार लट्ठेचिरी लकड़ी: बीम, तख़्ते, स्कैंटलिंगसुखाई (हवा या भट्टी में) और उपचारित
भारत में कहाँ बनता है
- महाराष्ट्र
वन से बाहर के पेड़ों से औद्योगिक लकड़ी की सबसे ज़्यादा संभावित उपज: 12.38 मिलियन घन मीटर प्रति वर्ष।
- उत्तर प्रदेश
8.56 मिलियन घन मीटर प्रति वर्ष संभावित।
- मध्य प्रदेश
7.07 मिलियन घन मीटर प्रति वर्ष संभावित।
- कर्नाटक
6.22 मिलियन घन मीटर प्रति वर्ष संभावित।
- राजस्थान
6.05 मिलियन घन मीटर प्रति वर्ष संभावित।
- छत्तीसगढ़
5.71 मिलियन घन मीटर प्रति वर्ष संभावित।
आयात कहाँ से आता है
2025-26 में भारत ने US$ 1,013.03 मिलियन के लट्ठे (HS 4403) और US$ 516.22 मिलियन की चिरी लकड़ी (HS 4407) आयात की।
- Australia — 2025-26 में HS 4403 के तहत US$ 187.37 मिलियन का आयात।
- Malaysia — 2025-26 में HS 4403 के तहत US$ 135.96 मिलियन का आयात।
- Uruguay — 2025-26 में HS 4403 के तहत US$ 118.67 मिलियन का आयात।
ख़रीदने या बेचने से पहले नियम
- अधिसूचित प्रजातियों की लकड़ी काटने और ले जाने के लिए राज्य वन विभाग से ट्रांज़िट परमिट चाहिए; नियम हर राज्य में अलग हैं।
- आयातित लट्ठों को प्लांट क्वारंटीन आदेश के तहत पादप-स्वच्छता मंज़ूरी और धूम्रीकरण चाहिए।
भंडारण और रख-रखाव
लट्ठे और चिरी लकड़ी को सहारों पर बीच में गुटके लगाकर, छत के नीचे रखें ताकि हवा चले और लकड़ी न फटे, न सड़े।
इसका उपयोग करने वाले बिज़नेस
लकड़ी का फ़र्नीचर बनाना →लकड़ी चिराई इकाई →लकड़ी के क्रेट (पेटी) बनाना →लकड़ी के पैटर्न (साँचे) बनाना →ब्लॉक बोर्ड और फ़्लश दरवाज़े बनाना →लकड़ी शिल्प इकाई (लकड़ी के फ़्रेम) →
