कहानी
रानीगंज कोयला क्षेत्र भारत का पहला व्यावसायिक कोयला क्षेत्र था, जो 18वीं सदी में खुला और कलकत्ता के उद्योगों और रेलवे को ईंधन देता रहा। आज़ादी के बाद बर्नपुर और दुर्गापुर में स्टील प्लांट और कोयले के आसपास कई इंजीनियरिंग और रिफ्रैक्टरी इकाइयाँ बनीं। ज़्यादातर खदानें ईस्टर्न कोलफ़ील्ड्स चलाती है, और अब कोल-बेड मीथेन भी निकाली जा रही है।
आँकड़ों में
पश्चिम बंगाल में निकाले जाने वाले खनिजों में 99% कोयला है, और राज्य में देश के कुल कोयला भंडार का 11% है।
Mining industry — Industry sectors, Government of West Bengal · 20152015 में राज्य के कुल कोयला भंडार/संसाधन 31.43 अरब टन आँके गए, जिनमें रानीगंज प्रमुख कोयला क्षेत्रों में है।
Mining industry — Industry sectors, Government of West Bengal · 2015
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- खनन ठेके: ओवरबर्डन हटाना, ढुलाई और लोडिंग
- खदानों और स्टील प्लांटों को पुर्ज़े, कन्वेयर बेल्ट और सुरक्षा सामान सप्लाई करें
- बिजलीघरों के पास फ़्लाई-ऐश ईंट इकाइयाँ
- स्टील प्लांटों के लिए रिफ्रैक्टरी ईंटें
क्लस्टर की मुश्किलें
- ज़मीन धँसना और भूमिगत आग
- अवैध खनन
- प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएँ
- कुछ बड़े सरकारी ख़रीदारों पर निर्भरता
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
फ्लाई ऐश ईंट यूनिट →फ़ायर क्ले रिफ़्रैक्टरी ईंट और ब्लॉक →धातुकर्म कोक इकाई (छोटे कोक ओवन) →माल ढुलाई उपकरण (मटीरियल हैंडलिंग) निर्माण →स्टोन क्रशर (गिट्टी) →
