कहानी
1990 के दशक में कपड़ा निर्यातक जगह और कम लागत के लिए दिल्ली से गुरुग्राम के उद्योग विहार और बाद में मानेसर आए, जो हवाई अड्डे के पास है। बड़े निर्यात घराने विदेशी ब्रांडों के लिए सिलाई करते हैं और छोटी इकाइयाँ उनके लिए जॉब-वर्क करती हैं। ज़िले में चमड़े के कपड़े और जूते की इकाइयाँ भी हैं। मज़दूरी और नियम-पालन पर ख़रीदारों की जाँच तय करती है कि इकाइयाँ कैसे चलें।
आँकड़ों में
गुड़गाँव रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर में 1,255 चालू इकाइयाँ थीं, कारोबार लगभग ₹1,335 करोड़, निर्यात ₹113 करोड़ और रोज़गार 87,380।
MSME-DI — Brief Industrial Profile of Gurgaon District · 2012गुड़गाँव चमड़ा सामान और कपड़ा क्लस्टर में 145 चालू इकाइयाँ थीं, कारोबार ₹239 करोड़, निर्यात ₹137 करोड़ और रोज़गार 56,400।
MSME-DI — Brief Industrial Profile of Gurgaon District · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- निर्यात घरानों के लिए कढ़ाई, छपाई या धुलाई का जॉब-वर्क
- नियम-पालन, ऑडिट की तैयारी और सामाजिक लेखा सेवाएँ
- लेबल, सजावटी सामान और पैकिंग की आपूर्ति
- छोटे ब्रांडों के लिए सैंपल स्टूडियो
क्लस्टर की मुश्किलें
- प्रशिक्षित लोगों की कमी
- रंग पक्का होने की जाँच की ज़रूरत
- बढ़ती मज़दूरी और किराया
- बांग्लादेश और वियतनाम से दाम का दबाव
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
रेडीमेड कपड़ा इकाई (बच्चों के रोम्पर) →ट्रैक सूट सिलाई →पुरुषों की टी-शर्ट →कंप्यूटराइज़्ड कढ़ाई (जॉब वर्क) →कपड़ा स्क्रीन प्रिंटिंग इकाई (साड़ी और कपड़ा) →बुने हुए लेबल (वोवन लेबल) निर्माण →चमड़े की जैकेट बनाना →
