कहानी
यमुनानगर का लकड़ी व्यापार पहाड़ों से यमुना में बहाकर लाए लट्ठों से शुरू हुआ। 1980 के दशक से हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने खेतों की मेड़ पर पॉपलर लगाया, तो शहर इसका मुख्य ख़रीदार बना और छिलाई, विनियर व प्लाईवुड इकाइयाँ कई गुना बढ़ीं। यहाँ का प्लाईवुड पूरे देश के फ़र्नीचर बनाने वालों और बिल्डरों तक जाता है। अब लकड़ी के दाम और आपूर्ति ही क्लस्टर का मुनाफ़ा तय करते हैं।
आँकड़ों में
भारत के प्लाईवुड बाज़ार में यमुनानगर का हिस्सा सबसे बड़ा है, 48 से 50% तक।
Ply Reporter — Yamunanagar: Opportunities and Challenges Ahead · 2020यमुनानगर में लगभग 350 प्लाईवुड इकाइयाँ हैं, जिनका सालाना कारोबार ₹6,000–8,000 करोड़ है।
The Tribune — Plywood industry struggling hard for survival
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- पॉपलर पौध की नर्सरी और खेत-वानिकी अनुबंध
- दूसरे राज्यों के डीलरों को प्लाईवुड और दरवाज़ों का व्यापार
- स्थानीय बोर्ड से फ़र्नीचर या मॉड्यूलर किचन पैनल बनाना
- प्लाईवुड इकाइयों को रेज़िन, गोंद और हार्डवेयर की आपूर्ति
क्लस्टर की मुश्किलें
- पॉपलर के ऊँचे दाम और घटती आवक
- नई लकड़ी इकाइयों के लाइसेंस पर सीमा
- बॉयलर और रेज़िन से प्रदूषण
- MDF और पार्टिकल बोर्ड से मुकाबला
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ब्लॉक बोर्ड और फ़्लश दरवाज़े बनाना →लकड़ी चिराई इकाई →लकड़ी का फ़र्नीचर बनाना →कंप्यूटर फ़र्नीचर (मेज़ और कुर्सियाँ) →पौध नर्सरी (फल / सजावटी) →
