कहानी
गुरुग्राम की ऑटो कहानी 1983 में शुरू हुई जब मारुति उद्योग ने सुज़ुकी के साथ यहाँ कारें बनानी शुरू कीं, फिर हीरो होंडा का दोपहिया संयंत्र आया। समय पर पुर्ज़े देने के लिए पास में सैकड़ों वेंडर इकाइयाँ लगीं, और बाद में नए संयंत्रों के लिए IMT मानेसर बना। यह इलाक़ा अब देश की कारों और दोपहियों का बड़ा हिस्सा बनाता है। गुरुग्राम के शहरी बनने के साथ नई कार क्षमता सोनीपत के खरखौदा जा रही है।
आँकड़ों में
मारुति के गुरुग्राम और मानेसर संयंत्रों की कुल क्षमता लगभग 15 लाख गाड़ियाँ सालाना थी।
Deccan Herald — Maruti Suzuki may expand Manesar plant capacity by one lakh units by April 2024 · 2022गुड़गाँव ऑटो पार्ट्स क्लस्टर में 1,478 चालू इकाइयाँ थीं, कारोबार लगभग ₹1,638 करोड़, निर्यात ₹345 करोड़ और रोज़गार 69,431।
MSME-DI — Brief Industrial Profile of Gurgaon District · 2012गुड़गाँव ऑटो रबर पार्ट्स क्लस्टर में 135 चालू इकाइयाँ थीं, कारोबार ₹145.47 करोड़ और रोज़गार 1,089।
MSME-DI — Brief Industrial Profile of Gurgaon District · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- OEM वेंडरों को मशीन, प्रेस या रबर पुर्ज़ों की टियर-2/टियर-3 आपूर्ति
- वेंडरों के लिए टूलिंग, डाई और फ़िक्सचर
- संयंत्रों के लिए ढुलाई, गोदाम और स्टाफ़ सेवा
- इलेक्ट्रिक वाहन पुर्ज़े और चार्जिंग उपकरण की आपूर्ति
क्लस्टर की मुश्किलें
- गुरुग्राम में ज़मीन और मज़दूरी महँगी
- छोटी इकाइयों की कम बिजली की शिकायत
- नए संयंत्रों का दूसरी जगह जाना
- कुछ बड़ी कार कंपनियों पर निर्भरता
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ऑटोमोबाइल पिस्टन निर्माण →उद्योगों के लिए ढले रबर पुर्ज़े (बुश, O-रिंग, सील) →एल्युमिनियम प्रेशर डाई कास्टिंग (वाहन पुर्ज़े सहित) →ऑटो कंट्रोल केबल →ऑटोमोटिव एयर फ़िल्टर निर्माण →प्लास्टिक इंजेक्शन मोल्डिंग (डिब्बे) →CNC इंजीनियरिंग वर्कशॉप (बारीक जॉब वर्क) →
