कहानी
1947 के बाद फ़रीदाबाद को पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत से आए शरणार्थियों की बस्ती के रूप में बसाया गया, जहाँ उन्हें काम देने के लिए छोटे उद्योग लगे। दिल्ली–मथुरा रोड पर होने से एस्कॉर्ट्स जैसी बड़ी कंपनियाँ आईं और उनके आसपास सैकड़ों सहायक इकाइयाँ बढ़ीं। ज़िला हरियाणा के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक बना, जहाँ ट्रैक्टर, गाड़ी के पुर्ज़े, मोटर और मिट्टी हटाने की मशीनें बनती हैं। ख़राब अंदरूनी सड़कें, नालियाँ और बिजली पुरानी शिकायतें हैं।
आँकड़ों में
फ़रीदाबाद में 17,186 पंजीकृत औद्योगिक इकाइयाँ थीं, जिनमें 180 मध्यम और बड़ी; मुख्य निर्यात सामान गाड़ी के पुर्ज़े, जूते और ट्रैक्टर थे।
MSME-DI New Delhi — Brief Industrial Profile of Faridabad District · 2012सतह-उपचार (इलेक्ट्रोप्लेटिंग) क्लस्टर में 275 चालू इकाइयाँ थीं, जिनमें 1,375 लोग काम करते थे।
MSME-DI New Delhi — Brief Industrial Profile of Faridabad District · 2012बल्लभगढ़ में JCB का एक्सकेवेटर संयंत्र रोज़ 110 मशीनें बनाता है।
Outlook Business — On Auto Pilot · 2018
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ट्रैक्टर, निर्माण मशीन और गाड़ी कंपनियों के लिए वेंडर आपूर्ति
- इलेक्ट्रोप्लेटिंग, पाउडर कोटिंग और हीट-ट्रीटमेंट जॉब-वर्क
- बड़े संयंत्रों के लिए फ़ैब्रिकेशन और रखरखाव सेवा
- छोटी इंजीनियरिंग इकाइयों के लिए जाँच प्रयोगशाला
क्लस्टर की मुश्किलें
- बिजली और पानी की कमी
- डाई-कास्टिंग इकाइयों में मज़दूरों की कमी
- ग़ैर-औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए ज़मीन तय नहीं
- ख़राब अंदरूनी सड़कें और नालियाँ
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
एल्युमिनियम प्रेशर डाई कास्टिंग (वाहन पुर्ज़े सहित) →इलेक्ट्रोस्टैटिक पाउडर कोटिंग इकाई →सटीक शीट-मेटल फ़ैब्रिकेशन (जॉब शॉप) →ऑटोमोबाइल गियर निर्माण →ब्रेक शू निर्माण →CNC इंजीनियरिंग वर्कशॉप (बारीक जॉब वर्क) →माल ढुलाई उपकरण (मटीरियल हैंडलिंग) निर्माण →
