कहानी
पानीपत के बुनकर सदियों से हथकरघे पर दरियाँ और कंबल बनाते आए हैं। 1947 के बाद आए शरणार्थी बुनकरों ने करघे लगाए, और 1980 के दशक से शहर पुराने ऊनी कपड़े और कतरन आयात करके कंबलों के लिए सस्ता 'शॉडी' धागा कातने लगा। इससे पानीपत दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा रीसाइक्लिंग केंद्रों में से एक और दरियों, बाथ मैट व घर के कपड़ों का बड़ा निर्यातक बना। निर्यात काफ़ी हद तक अमेरिका और यूरोप के बाज़ार पर टिका है।
आँकड़ों में
पानीपत का सालाना कारोबार ₹1,30,000 करोड़ से ज़्यादा, निर्यात ₹30,000 करोड़ है, और यह 4,00,000 से ज़्यादा लोगों की रोज़ी चलाता है।
Foundation for MSME Clusters — Panipat Textile Recycling: Sustainability Readiness Report
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- रीसाइक्लिंग इकाइयों के लिए कपड़े की कतरन छाँटना और श्रेणी बनाना
- घर के कपड़ों की सिलाई और फ़िनिशिंग का जॉब-वर्क
- पानीपत के कंबल और दरियाँ दुकानों और ई-कॉमर्स को बेचना
- टिकाऊ फ़ैशन ब्रांडों को प्रमाणित रीसाइकिल धागे की आपूर्ति
क्लस्टर की मुश्किलें
- अमेरिकी बाज़ार पर निर्भरता और शुल्क के झटके
- रंगाई इकाइयों का गंदा पानी
- घर के कपड़ों में चीन से मुकाबला
- मज़दूरों की कमी
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
कपड़ा कतरन रीसाइक्लिंग →पुरानी ऊन से कंबल बनाना →तौलिया निर्माण →चादर बुनाई इकाई (पावरलूम) →बेड लिनन सिलाई इकाई (चादर और तकिये के कवर) →घर-सजावट के कपड़े सिलने की इकाई →पर्दे बनाना →ऊनी दरी बुनाई →हाथ से बनी कालीन इकाई →धागा बटाई (डबलिंग) जॉब वर्क →
