कहानी
जेतपुर के छपाईकारों ने स्थानीय साड़ियों के लिए हाथ की ब्लॉक छपाई से शुरुआत की और बाद में बड़े पैमाने पर स्क्रीन प्रिंटिंग अपनाई। यह क़स्बा भारतीय ख़रीदारों के साथ-साथ अफ़्रीकी बाज़ारों के लिए छपे सूती कपड़े का बड़ा सप्लायर बन गया। इकाइयों का गंदा पानी भादर नदी में जाने से लंबे अदालती मामले चले और साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र की माँग उठी।
आँकड़ों में
जेतपुर कपड़ा क्लस्टर में रंगाई और छपाई की 1,200 इकाइयाँ, ₹1,500 करोड़ का कारोबार, ₹1,000 करोड़ का निर्यात और 45,000 कामगार थे, जिनमें 80% दिहाड़ी पर थे (ज़िला प्रोफ़ाइल 2012-13)।
Brief Industrial Profile of Rajkot District 2012-13 (MSME-DI Rajkot, Ministry of MSME) · 2013
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- स्क्रीन और डिजिटल छपाई जॉब-वर्क
- रंग, रसायन और स्क्रीन की सप्लाई
- अफ़्रीका को छपा कपड़ा निर्यात करना
- अपशिष्ट जल शोधन और पानी रीसाइक्लिंग सेवाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- भादर नदी का प्रदूषण और गाँवों का विरोध
- गैस और रसायनों के बढ़ते दाम
- ज़्यादातर दिहाड़ी कामगार
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
साड़ी रंगाई और छपाई →कपड़ा स्क्रीन प्रिंटिंग इकाई (साड़ी और कपड़ा) →हाथ की ठप्पा छपाई इकाई (छपे सूट) →दुपट्टा रँगाई (कलरिंग और डाइंग) यूनिट →
