कहानी
सूरत सदियों तक रेशम और ज़री बुनाई का शहर रहा, और आज़ादी के बाद यहाँ के बुनकर पावरलूम पर सस्ते सिंथेटिक धागे की ओर मुड़ गए। टेक्सचराइज़िंग इकाइयाँ, बुनाई शेड, रंगाई-छपाई घर और बड़े थोक कपड़ा बाज़ार साथ-साथ बढ़े, इसलिए कपड़ा शहर के भीतर ही बनकर बिक जाता है। रिंग रोड के कपड़ा बाज़ार पूरे भारत में साड़ी और ड्रेस मटीरियल भेजते हैं, और नए वॉटर-जेट और रेपियर लूम पलसाणा, कडोदरा और बारडोली तक फैल गए हैं।
आँकड़ों में
सूरत ज़िले में 65,000 से ज़्यादा पावरलूम, लगभग 500 टेक्सचराइज़िंग इकाइयाँ और 400 प्रोसेसिंग हाउस हैं; प्रोफ़ाइल इसे 'भारत की सिंथेटिक राजधानी' कहती है (ज़िला प्रोफ़ाइल, लगभग 2012)।
Brief Industrial Profile of Surat District (MSME-DI Ahmedabad, Ministry of MSME) · 2012ज़िले की 41,300 से ज़्यादा छोटी और मध्यम इकाइयों में से लगभग 24,000 कपड़ा क्षेत्र में हैं (ज़िला प्रोफ़ाइल, लगभग 2012)।
Brief Industrial Profile of Surat District (MSME-DI Ahmedabad, Ministry of MSME) · 2012सूरत, टेक्सटाइल क्लस्टर विकास योजना के पाँच पावरलूम मेगा क्लस्टरों में से एक है; बाक़ी हैं इरोड, इचलकरंजी, बेंगलुरु और कारंजा।
Annexure 6, textile cluster study (NCAER) · 2025
GI टैग
- Surat Zari Craftआवेदन संख्या GI Application No. 171Registration details of Geographical Indications (GI Registry, IP India)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- किराए के लूम पर जॉब-वर्क बुनाई
- रिंग रोड बाज़ारों से साड़ी और ड्रेस मटीरियल का व्यापार
- कढ़ाई और वैल्यू-एडिशन जॉब-वर्क
- धागा, पुर्ज़े और लूम की सप्लाई
क्लस्टर की मुश्किलें
- कम मुनाफ़ा और सस्ता आयात
- रंगाई-छपाई के लिए प्रदूषण नियम
- व्यस्त मौसम में प्रवासी मज़दूरों की कमी
- पुराने लूम बदलने की ज़रूरत
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
साड़ी रंगाई और छपाई →कपड़ा छपाई (स्क्रीन प्रिंटिंग) →ज़री और सिल्क कढ़ाई →कंप्यूटराइज़्ड कढ़ाई (जॉब वर्क) →धागा बटाई (डबलिंग) जॉब वर्क →साड़ी रोलिंग और पॉलिशिंग →
