कहानी
राजकोट का इंजीनियरिंग आधार उन छोटी वर्कशॉप से शुरू हुआ जो सौराष्ट्र के किसानों और उनके सिंचाई कुओं के लिए ऑयल इंजन बनाती थीं। भूजल गिरने पर कंपनियाँ डीज़ल इंजन से सबमर्सिबल पंप की ओर गईं, फिर ऑटो कंपनियों और रिप्लेसमेंट बाज़ार के लिए बेयरिंग और ऑटो पार्ट्स बनाने लगीं। भक्तिनगर, आजी और शापर-वेरावल औद्योगिक क्षेत्रों में आज सैकड़ों मशीन शॉप हैं जो एक-दूसरे को सामान देती हैं।
आँकड़ों में
राजकोट इंजीनियरिंग (डीज़ल इंजन और पंप) क्लस्टर में 375 इकाइयाँ, ₹200 करोड़ का कारोबार और 7,500 कामगार थे (ज़िला प्रोफ़ाइल 2012-13)।
Brief Industrial Profile of Rajkot District 2012-13 (MSME-DI Rajkot, Ministry of MSME) · 2013बेयरिंग क्लस्टर में 60 उत्पादक, ₹400 करोड़ का कारोबार, ₹220 करोड़ का निर्यात और 6,600 कामगार थे (ज़िला प्रोफ़ाइल 2012-13)।
Brief Industrial Profile of Rajkot District 2012-13 (MSME-DI Rajkot, Ministry of MSME) · 2013ऑटोमोबाइल पार्ट्स क्लस्टर में 303 इकाइयाँ, ₹750 करोड़ का कारोबार, ₹400 करोड़ का निर्यात और 9,500 कामगार थे; यहाँ 300 से ज़्यादा तरह के पुर्ज़े बनते हैं (ज़िला प्रोफ़ाइल 2012-13)।
Brief Industrial Profile of Rajkot District 2012-13 (MSME-DI Rajkot, Ministry of MSME) · 2013पंप-सेट क्लस्टर में 161 इकाइयाँ, ₹300 करोड़ का कारोबार और 4,700 कामगार थे (ज़िला प्रोफ़ाइल 2012-13)।
Brief Industrial Profile of Rajkot District 2012-13 (MSME-DI Rajkot, Ministry of MSME) · 2013
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ऑटो और पंप निर्माताओं के लिए CNC जॉब-वर्क
- पंप और मोटर के पुर्ज़े बनाना
- टेस्टिंग और कैलिब्रेशन सेवाएँ
- किसानों को पंप और पुर्ज़े बेचना
क्लस्टर की मुश्किलें
- किसानों के सबमर्सिबल पंप अपनाने से डीज़ल इंजन की माँग घटी
- सस्ते चीनी उत्पादों से होड़
- प्रशिक्षित मशीनिस्ट की कमी
- अपने ब्रांड वाली कंपनियाँ कम
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
सबमर्सिबल पंप सेट निर्माण (खेती के लिए) →मोनोसेट पानी पंप बनाना →ऑटोमोबाइल पिस्टन निर्माण →वाहन सिलिंडर लाइनर ढलाई और मशीनिंग →दोपहिया इंजन सिलेंडर ढलाई →CNC इंजीनियरिंग वर्कशॉप (बारीक जॉब वर्क) →डीज़ल इंजन और पंप सेट मरम्मत →
