कहानी
राजकोट की फ़ाउंड्रियाँ यहाँ के इंजन, पंप और मशीन टूल निर्माताओं को लोहे के ढले पुर्ज़े देने के लिए बढ़ीं। ज़्यादातर इकाइयाँ छोटी हैं और क्यूपोला में लोहा पिघलाती हैं, इसलिए ऊर्जा की लागत और धुआँ हमेशा चिंता रहते हैं। TERI और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ाउंड्रीमेन ने कई इकाइयों को ज़्यादा कुशल डिवाइडेड-ब्लास्ट क्यूपोला अपनाने में मदद की है।
आँकड़ों में
फ़ाउंड्री क्लस्टर में 505 इकाइयाँ (355 सूक्ष्म, 145 लघु, 5 मध्यम), ₹2,700 करोड़ का कारोबार, ₹350 करोड़ का निर्यात और 20,000 कामगार थे (ज़िला प्रोफ़ाइल 2012-13)।
Brief Industrial Profile of Rajkot District 2012-13 (MSME-DI Rajkot, Ministry of MSME) · 2013
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- कास्टिंग की मशीनिंग और फ़िनिशिंग
- पैटर्न बनाना
- रेत, कोक और मिश्र धातु की सप्लाई
- स्क्रैप इकट्ठा करना और छाँटना
क्लस्टर की मुश्किलें
- वायु प्रदूषण नियम
- ऊर्जा की ऊँची लागत
- प्रशिक्षित धातु विशेषज्ञों की कमी
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हाई ड्यूटी आयरन कास्टिंग (ढलाईघर) →मैलिएबल आयरन कास्टिंग (पाइप फ़िटिंग और ऑटो पुर्ज़े) →स्टील कास्टिंग (इंडक्शन भट्ठी वाली ढलाई) →लकड़ी के पैटर्न (साँचे) बनाना →धातु कबाड़ रीसाइक्लिंग यूनिट →
