कहानी
झारखंड के साल और अर्जुन के जंगलों में आदिवासी परिवार जंगली टसर रेशम कीट पालते हैं, जिससे यह राज्य भारत का प्रमुख टसर उत्पादक है। कुचाई और भगैया के बुनकर इस धागे से साड़ियाँ और कपड़े बनाते हैं, जिनमें से कई अब GI पंजीकृत हैं। राँची का केंद्रीय टसर अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान पालकों को बीज और प्रशिक्षण देता है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Jharkhand Tussar Silkआवेदन संख्या Application No. 1257Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
- Kuchai Silk Saree and Fabricsआवेदन संख्या Application No. 889Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
- Bhagaiya Saree and Fabricsआवेदन संख्या Application No. 888Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- पालन वाले गाँवों के पास कोकून बैंक और रीलिंग इकाइयाँ
- GI टैग वाली टसर साड़ियाँ ऑनलाइन बेचें
- टसर कपड़े की डिज़ाइनिंग और परिधान निर्माण
क्लस्टर की मुश्किलें
- कोकून पालन में बीमारी और मौसम से नुकसान
- कम रीलिंग दक्षता और धागे की गुणवत्ता
- बुनकरों का बाज़ार से कमज़ोर जुड़ाव
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →साड़ी रंगाई और छपाई →कपड़े के मेड-अप्स (नैपकिन, मैट, एप्रन) →
