कहानी
जोधपुर के बढ़ई और धातु कारीगर पहले पारंपरिक फ़र्नीचर और घरेलू सामान बनाते थे, और बाद में निर्यातकों ने 'कॉलोनियल' और देसी अंदाज़ का फ़र्नीचर विदेश भेजना शुरू किया। स्थानीय बबूल, शीशम और आम की लकड़ी, और गाँवों से ख़रीदे पुराने दरवाज़े-खिड़कियों ने शहर को अलग पहचान दी। बोरानाडा और बासनी औद्योगिक क्षेत्रों में आज सैकड़ों निर्यात इकाइयाँ हैं।
आँकड़ों में
धातु और लकड़ी हस्तशिल्प क्लस्टर (पाल शिल्पग्राम, बोरानाडा) में 1,000 इकाइयाँ, ₹3,500 करोड़ का कारोबार, ₹2,000 करोड़ का सालाना निर्यात और 10,000 कामगार थे (ज़िला प्रोफ़ाइल 2015-16)।
Brief Industrial Profile of Jodhpur District 2015-16 (MSME-DI Jaipur, Ministry of MSME) · 2016वुडन हैंडीक्राफ़्ट क्लस्टर, जोधपुर MSE-CDP के चल रहे साझा सुविधा केंद्रों की सूची में है (मार्च 2024)।
Ongoing Common Facility Centres under MSE-CDP, updated 20.03.2024 (DC-MSME) · 2024
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- निर्यातकों के लिए फ़िनिशिंग, पॉलिश और पैकिंग जॉब-वर्क
- भारत में फ़र्नीचर की ऑनलाइन बिक्री
- लकड़ी सुखाना और उपचार
- धातु की फ़िटिंग और हार्डवेयर बनाना
क्लस्टर की मुश्किलें
- कच्चे माल पर भारी कर
- औद्योगिक ज़मीन की कमी
- कुशल मज़दूरों और जाँच सुविधाओं की कमी
- निर्यात बाज़ारों में लकड़ी की वैधता के नियम
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
लकड़ी का फ़र्नीचर बनाना →लकड़ी नक्काशी इकाई (फ़ोटो फ़्रेम) →रॉट आयरन (सजावटी लोहे का) फ़र्नीचर →धातु हस्तशिल्प यूनिट →बढ़ईगीरी कार्यशाला (लकड़ी का फ़र्नीचर) →लकड़ी के क्रेट (पेटी) बनाना →
