कहानी
जयपुर की ब्लू पॉटरी मिट्टी से नहीं, बल्कि क्वार्ट्ज़ पाउडर, काँच और दूसरी चीज़ों के गूँधे मिश्रण से बनती है, जिस पर कोबाल्ट नीले रंग से चित्र बनाकर कम आँच पर पकाया जाता है। यह कला राजसी संरक्षण में जयपुर आई और 20वीं सदी में फिर से जीवित हुई। जयपुर के आसपास की छोटी वर्कशॉप पर्यटकों और निर्यात के लिए टाइलें, कटोरे, फूलदान और नॉब बनाती हैं।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Blue Pottery of Jaipurआवेदन संख्या GI Application No. 66Registration details of Geographical Indications (GI Registry, IP India)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- होटलों और घरों के लिए सजावटी सामान और टाइलें
- विदेशी ख़रीदारों को ऑनलाइन बिक्री
- पर्यटकों के लिए पॉटरी वर्कशॉप
क्लस्टर की मुश्किलें
- नाज़ुक सामान और भेजने में टूट-फूट
- सस्ती मशीन से बनी नक़ल
- कम पूँजी वाली छोटी वर्कशॉप
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
सिरेमिक कलात्मक सामान →लोक कला और कला दीर्घा का ऑनलाइन मार्केटप्लेस →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
