कहानी
भीलवाड़ा की पहली कताई मिल, मेवाड़ टेक्सटाइल मिल्स, 1935 में लगी, और 1980 के दशक के अंत में लाइसेंस की शर्त हटने के बाद और मिलें व बुनाई इकाइयाँ आईं। सिंथेटिक और मिश्रित सूटिंग के लिए ज़िला 'वस्त्र नगरी' के नाम से जाना जाने लगा। कताई मिलें, आधुनिक शटल-रहित करघे और प्रोसेस हाउस अब पास-पास हैं।
आँकड़ों में
भीलवाड़ा को सिंथेटिक व सूत-मिश्रित कपड़े और सिंथेटिक धागे के लिए विश्व प्रसिद्ध 'वस्त्र नगरी' बताया गया है (ज़िला प्रोफ़ाइल 2015-16)।
Brief Industrial Profile of Bhilwara District 2015-16 (MSME-DI Jaipur, Ministry of MSME) · 2016ज़िले में 18 बड़ी कताई मिलें और लगभग 17,000 आधुनिक करघे हैं, जिनमें ज़्यादातर शटल-रहित हैं (मेवाड़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री)।
Textile industry of Bhilwara (Mewar Chamber of Commerce & Industry) · 2018कपड़ा उद्योग से लगभग 85,000 प्रत्यक्ष और 60,000 अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलते हैं; भीलवाड़ा को 26 फ़रवरी 2009 को 'निर्यात उत्कृष्टता नगर' घोषित किया गया (मेवाड़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री)।
Textile industry of Bhilwara (Mewar Chamber of Commerce & Industry) · 2018
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- सूटिंग ब्रांडों के लिए बुनाई जॉब-वर्क
- स्थानीय कपड़े से गारमेंट और यूनिफ़ॉर्म बनाना
- कपड़ा व्यापार और एजेंसी
- करघे के पुर्ज़े और रखरखाव
क्लस्टर की मुश्किलें
- ज़्यादातर साधारण, कम दाम की सूटिंग
- प्रोसेस हाउस के गंदे पानी का शोधन
- दूसरे कपड़ा केंद्रों से होड़
- बिजली की लागत
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
रेडीमेड कपड़ा इकाई (बच्चों के रोम्पर) →धागा बटाई (डबलिंग) जॉब वर्क →सूती बुने (निटेड) कपड़े की ब्लीचिंग और रंगाई (जॉब-वर्क) →ट्रैक सूट सिलाई →डेनिम कपड़े (जींस, जैकेट, शॉर्ट्स) →
