कहानी
मेरठ में खेल का सामान बनाने का काम बँटवारे के बाद बढ़ा, जब सियालकोट के कारीगर यहाँ बसे और अपना काम फिर शुरू किया। आज शहर और आसपास के गाँव लगभग हर तरह का खेल सामान बनाते हैं, क्रिकेट किट और शटलकॉक से लेकर फ़िटनेस उपकरण और खेल के कपड़ों तक। कुछ बड़े ब्रांड छोटी इकाइयों और घर से काम करने वाले कारीगरों के बड़े नेटवर्क के साथ काम करते हैं।
आँकड़ों में
मेरठ ज़िला उद्योग केंद्र के आँकड़ों के अनुसार 2025-26 में खेल से जुड़ी 9,720 MSME इकाइयों का कारोबार लगभग ₹1,852 करोड़ रहा, और सालाना निर्यात लगभग ₹975 करोड़ है।
Down To Earth: Meerut's sports cluster needs Centre's support for a just transition · 2026मेरठ खेल क्लस्टर से 3,00,000 से अधिक कारीगर, महिला कामगार और छोटे उद्यमी जुड़े हैं।
Down To Earth: Meerut's sports cluster needs Centre's support for a just transition · 20262021-22 में मेरठ ने 66.01 मिलियन अमेरिकी डॉलर का खेल सामान (HSN 9506) निर्यात किया, जो जालंधर के बाद दूसरा स्थान है, और इसे खेल सामान के लिए 'ज़िला निर्यात केंद्र' चुना गया है।
DGCI&S Kolkata: A Brief Report on India's Exports of Toys, Games and Sports Requisites · 2025
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- बल्ले की फ़िनिशिंग, गेंद की सिलाई और शटलकॉक जोड़ने का जॉब-वर्क
- विलो लकड़ी, चमड़ा, पंख और पैकिंग की सप्लाई
- ई-कॉमर्स और स्कूल खरीदारों के लिए अपने ब्रांड का खेल सामान
- खेल कपड़ों की सिलाई और छपाई
क्लस्टर की मुश्किलें
- वायु प्रदूषण नियम और NCR की पाबंदियाँ काम पर असर डालती हैं
- ज़्यादातर इकाइयाँ घरेलू हैं और पूँजी कम है
- आयातित विलो और कच्चे माल से लागत बढ़ती है
- निर्यात बाज़ार में सियालकोट और चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
क्रिकेट बैट →PVC क्रिकेट बैट और गेंद निर्माण →चमड़े की क्रिकेट गेंद बनाना →क्रिकेट बैटिंग दस्ताने बनाने की इकाई →पंख वाली शटलकॉक बनाना →बैडमिंटन रैकेट निर्माण →हॉकी स्टिक निर्माण →खेल के जूते बनाने की इकाई →ट्रैक सूट सिलाई →
