कहानी
भारत की पहली फ़ीचर फ़िल्म 'राजा हरिश्चंद्र' दादासाहेब फाल्के ने 1913 में बंबई में बनाई, और 1930 के दशक से दादर, परेल और अंधेरी में स्टूडियो बने। पैसा, कलाकार, लेखक और तकनीशियन सब मुंबई में इकट्ठा हुए, और हिंदी फ़िल्म उद्योग को बॉलीवुड कहा जाने लगा। 1977 में महाराष्ट्र सरकार ने गोरेगाँव में फ़िल्म सिटी बनाई ताकि निर्माताओं को शहर के अंदर ही बड़े सेट और बाहरी लोकेशन मिलें। टीवी और स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म के बाद अंधेरी से गोरेगाँव तक का इलाक़ा एक बड़ा निर्माण क्षेत्र बन गया है।
आँकड़ों में
गोरेगाँव की फ़िल्म सिटी (दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी) 1977 में बनी और मुंबई के उपनगर में 520 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर फैली है।
India Cine Hub (Ministry of I&B) – Film City, Mumbaiफ़िल्म सिटी में लगभग 42 बाहरी शूटिंग लोकेशन हैं और इसे महाराष्ट्र फ़िल्म, रंगमंच और सांस्कृतिक विकास निगम चलाता है; 2001 में इसका नाम दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी रखा गया।
India Cine Hub (Ministry of I&B) – Film City, Mumbaiभारत का हिंदी (बॉलीवुड) और मराठी फ़िल्म और टीवी उद्योग मुंबई में है।
Brief Industrial Profile of Mumbai District, MSME-DI (Ministry of MSME) · 2012
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- उपकरण किराये पर देना: कैमरा, लाइट, जनरेटर, वैनिटी वैन
- पोस्ट-प्रोडक्शन सेवाएँ: एडिटिंग, डबिंग, सबटाइटल, कलर ग्रेडिंग और विज़ुअल इफ़ेक्ट्स
- शूटिंग के लिए खाना, परिवहन, सेट बनाना और पोशाक की आपूर्ति
- विज्ञापन फ़िल्मों, यूट्यूब और क्षेत्रीय भाषा की सामग्री के लिए छोटे स्टूडियो
क्लस्टर की मुश्किलें
- काम अनियमित और भुगतान देर से
- स्टूडियो और घर का ऊँचा किराया
- कड़ी प्रतियोगिता और जान-पहचान पर निर्भरता
- पायरेसी और दर्शकों की तेज़ी से बदलती आदतें
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियोग्राफ़ी स्टूडियो →एनिमेशन प्रोडक्शन स्टूडियो →आयोजन फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियोग्राफ़ी →
