कहानी
जब मुर्शिदाबाद बंगाल के नवाबों की राजधानी था तब यहाँ रेशम बुनाई फली-फूली, और ईस्ट इंडिया कंपनी के समय भी यह व्यापार चलता रहा। मालदा और मुर्शिदाबाद में शहतूत उगाया और रेशम कीट पाला जाता है, जिससे पास के गाँवों के बुनकरों को स्थानीय धागा मिलता है। इस क्षेत्र के कई रेशम उत्पादों को अब GI टैग मिला है, और केंद्रीय रेशम बोर्ड का एक अनुसंधान संस्थान बहरमपुर में है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Murshidabad Silkआवेदन संख्या Application No. 1044Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
- Garad Sareeआवेदन संख्या Application No. 703Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
- Korial Sareeआवेदन संख्या Application No. 704Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
- Malda Nistari Silk Yarnआवेदन संख्या Application No. 921Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- स्थानीय बुनकरों को धागा देने वाली रेशम रीलिंग और ट्विस्टिंग इकाइयाँ
- GI टैग वाली साड़ियाँ सीधे ऑनलाइन बेचें
- रेशमी कपड़े की रंगाई, छपाई और फ़िनिशिंग सेवाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- सस्ते आयातित रेशमी धागे से मुकाबला
- युवाओं का बुनाई छोड़ना
- बुनकरों की कम और अनियमित आय
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
साड़ी रंगाई और छपाई →साड़ी रोलिंग और पॉलिशिंग →ज़री और सिल्क कढ़ाई →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
