कहानी
पाटण के साळवी परिवार सदियों से डबल इकत पटोला बुनते आए हैं; बुनाई से पहले ताना और बाना दोनों बाँधकर रंगे जाते हैं, ताकि डिज़ाइन दोनों तरफ़ दिखे। एक साड़ी में महीनों लग सकते हैं, इसलिए पटोला दुर्लभ और महँगा है। पाटण में मशरू भी बनता है, जो रेशम और सूत का मिला कपड़ा है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Patan Patolaआवेदन संख्या GI Application No. 232Registration details of Geographical Indications (GI Registry, IP India)
- Patan Mashru Sareeआवेदन संख्या GI Application No. 1266Registration details of Geographical Indications (GI Registry, IP India)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- बड़े बाज़ार के लिए दूसरे कपड़ों में पटोला से प्रेरित डिज़ाइन
- शिल्प पर्यटन और बुनाई प्रदर्शन
- असली GI उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री
क्लस्टर की मुश्किलें
- बहुत धीमा और महँगा उत्पादन
- सस्ती छपी हुई नक़ल
- बहुत कम परिवार अब बुनते हैं
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