कहानी
मुग़लों के समय कश्मीरी शॉल मशहूर हुईं, जब लद्दाख और तिब्बत की बकरियों की बारीक पश्मीना ऊन श्रीनगर में हाथ से काती और बुनी जाती थी। कानी शॉल चार पैडल वाले करघे पर लकड़ी की छोटी तीलियों (कानी) से बुनी जाती है, और बडगाम का कनिहामा गाँव इसका सबसे जाना-माना केंद्र है। सोज़नी कारीगर सादी पश्मीना पर बारीक सुई का काम करते हैं। कातने वाले, बुनकर, रंगरेज़ और कढ़ाई करने वाले ज़्यादातर घर से काम करते हैं और श्रीनगर के व्यापारियों व निर्यातकों से जुड़े हैं।
आँकड़ों में
हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग, कश्मीर के अनुसार पिछले तीन साल में कानी और सोज़नी शॉल का निर्यात ₹1,105 करोड़ रहा।
Daily Excelsior — Kashmir shawls, carpet lead in exports · 2025
GI टैग
- Kashmir Pashminaआवेदन संख्या GI Application No. 46IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Kani Shawlआवेदन संख्या GI Application No. 51IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Kashmir Sozani Craftआवेदन संख्या GI Application No. 48IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Kashmir Crewelआवेदन संख्या GI Application No. 1047IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Kashmir Tweedआवेदन संख्या GI Application No. 1048IP India — Registration Details of Geographical Indications
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- जाँचे जा सकने वाले लेबल के साथ GI-प्रमाणित पश्मीना ऑनलाइन बेचना
- बुनकरों के लिए रंगाई, धुलाई और फ़िनिशिंग सेवा
- आधुनिक स्टोल के लिए डिज़ाइन साझेदारी
- कनिहामा और श्रीनगर में शिल्प पर्यटन
क्लस्टर की मुश्किलें
- मशीन से बनी और मिलावटी नकल को पश्मीना बताकर बेचना
- कम मज़दूरी से युवा बुनकरों का काम छोड़ना
- कच्ची पश्मीना की आपूर्ति और दाम
- वैश्विक संघर्षों से निर्यात माँग पर असर
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
शॉल, स्टोल, स्कार्फ़ और रैप →ज़री और सिल्क कढ़ाई →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →ऊनी फ़ेल्ट उत्पाद →
