कहानी
15वीं सदी में पेपर-माशी फ़ारस से कश्मीर आई और श्रीनगर के पुराने शहर में निखरी, जहाँ परिवार काग़ज़ की लुगदी से बने सामान पर बारीक फूलों के नमूने रंगते हैं। अखरोट की लकड़ी की नक़्क़ाशी में घाटी के अखरोट के पेड़ों की लकड़ी से जाली, मेज़ और डिब्बे बनते हैं, और ख़तमबंद छतों में लकड़ी के छोटे टुकड़े बिना कील ज्यामितीय नमूनों में जोड़े जाते हैं। ये शिल्प पर्यटकों और निर्यात ख़रीदारों को ख़ूब बिकते हैं, क्रिसमस सजावट भी। कारीगरों की संख्या पर्यटन और निर्यात माँग के साथ घटती-बढ़ती है।
आँकड़ों में
हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग के अनुसार उसने घाटी भर में 8,102 नए पेपर-माशी कारीगरों को प्रशिक्षण दिया है।
Kashmir Reader — Over 8,000 new artisans trained in GI-registered papier mache craft · 2026एक सरकारी निदेशक के अनुसार लगभग 3,000 कारीगर पेपर-माशी के काम से जुड़े थे।
Al Jazeera — Kashmir papier-mache artists struggle amid pandemic, few tourists · 2021
GI टैग
- Kashmir Paper Machieआवेदन संख्या GI Application No. 181IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Kashmir Walnut Wood Carvingआवेदन संख्या GI Application No. 182IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Khatambandआवेदन संख्या GI Application No. 204IP India — Registration Details of Geographical Indications
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- क्रिसमस और त्योहारी सजावट की ऑनलाइन और निर्यात बिक्री
- होटल और इंटीरियर परियोजनाओं में ख़तमबंद और अखरोट नक़्क़ाशी
- पर्यटकों के लिए शिल्प कार्यशालाएँ
- कारीगरों के लिए पैकिंग और भेजने की सेवा
क्लस्टर की मुश्किलें
- पर्यटन और निर्यात के चक्र पर निर्भरता
- अखरोट की लकड़ी की कमी और लागत
- सस्ती नकल
- कम कमाई से युवा कारीगरों का काम छोड़ना
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
मंदिर के फूलों से पेपर मैशे उत्पाद →लकड़ी नक्काशी इकाई (फ़ोटो फ़्रेम) →लकड़ी का फ़र्नीचर बनाना →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →अखरोट प्रसंस्करण (गिरी) इकाई →
