कहानी
पांपोर के आसपास करेवा (ऊँचे पठार) की मिट्टी में सदियों से केसर उगता है, जो इसे भारत के केसर उत्पादन का केंद्र बनाता है। परिवार अक्टूबर–नवंबर में बैंगनी फूल हाथ से चुनते हैं और लाल धागे अलग करके सुखाते हैं। अनियमित बारिश, सिंचाई की कमी और ज़मीन के दूसरे उपयोग से दो दशकों में उत्पादन बहुत गिरा। राष्ट्रीय केसर मिशन और पांपोर के दुस्सू में जाँच व GI प्रमाणन वाला व्यापार केंद्र इसे फिर से खड़ा करने के लिए हैं।
आँकड़ों में
2018 तक के 22 सालों में कश्मीर का केसर उत्पादन 65% गिरकर 16 मीट्रिक टन से 5.6 मीट्रिक टन रह गया।
Scroll.in — Amid declining production, Kashmiri farmers seek GI tag for local saffron · 2020
GI टैग
- Kashmir Saffronआवेदन संख्या GI Application No. 635IP India — Registration Details of Geographical Indications
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- दुकानों और ऑनलाइन के लिए ब्रांडेड, GI-प्रमाणित केसर पैक
- केसर से बने उत्पाद — चाय मिश्रण, सौंदर्य प्रसाधन, मिठाई
- उत्पादकों के लिए केसर कंद बढ़ाना और देना
- जाँच और श्रेणी सेवा
क्लस्टर की मुश्किलें
- अनियमित बारिश और सिंचाई न होने से घटती उपज
- मिलावटी और ईरानी केसर को कश्मीरी बताकर बेचना
- केसर की ज़मीन का दूसरे कामों में जाना
- छोटी, बँटी हुई जोतें
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
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