कहानी
15वीं सदी में कालीन बुनाई फ़ारस से कश्मीर आई, और बुनकर आज भी 'तालीम' नाम की कूट लिपि पढ़कर गाँठ लगाते हैं। श्रीनगर और आसपास के गाँवों में घरों में करघे लगे हैं, और व्यापारी रेशम या ऊन देकर तैयार कालीन ख़रीदते हैं। कश्मीरी कालीन ज़्यादा गाँठ घनत्व और फ़ारसी शैली के डिज़ाइन के लिए जाने जाते हैं। मशीन से बने या आयातित कालीन को कश्मीरी बताकर बेचना रोकने के लिए QR कोड वाला GI लेबल शुरू किया गया।
आँकड़ों में
हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग, कश्मीर के अनुसार पिछले तीन साल में ₹728 करोड़ के हाथ से गाँठे कालीन निर्यात हुए।
Daily Excelsior — Kashmir shawls, carpet lead in exports · 2025
GI टैग
- Kashmiri Hand Knotted Carpetआवेदन संख्या GI Application No. 527IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Kashmir Namdaआवेदन संख्या GI Application No. 868IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Gabbaआवेदन संख्या GI Application No. 902IP India — Registration Details of Geographical Indications
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- विदेशी ख़रीदारों को GI-प्रमाणित कालीन ऑनलाइन बेचना
- कालीन धुलाई, मरम्मत और फ़िनिशिंग सेवा
- बुनकरों को रंगा रेशम और ऊन देना
- प्रामाणिक GI लेबल के साथ पर्यटकों के लिए कालीन शोरूम
क्लस्टर की मुश्किलें
- ईरानी और मशीन वाले कालीनों को कश्मीरी बताकर बेचना
- बुनकरों की कम मज़दूरी और सेहत की समस्याएँ
- लंबे उत्पादन समय में पूँजी फँसना
- निर्यात माँग में उतार-चढ़ाव
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
रेशमी कालीन बुनाई →हाथ से बनी कालीन इकाई →कालीन फ़िनिशिंग इकाई →ऊनी फ़ेल्ट उत्पाद →कालीन सफ़ाई सेवा →
