कहानी
पालार घाटी में चर्मशोधन उन्नीसवीं सदी के अंत में बढ़ा, जब स्थानीय व्यापारी वनस्पति टैनिंग से खाल प्रोसेस करने लगे। इस इलाक़े का ईस्ट इंडिया (EI) चमड़ा ब्रिटिश बाज़ारों में मशहूर हुआ और अब GI है। 1970 के दशक के बाद उद्योग तैयार चमड़े और फिर यूरोपीय ब्रांडों के जूतों की ओर बढ़ा। आज यह घाटी भारत की सबसे बड़ी चमड़ा और जूता निर्यात पट्टियों में है, और रानीपेट में भी बड़े टैनरी हैं।
आँकड़ों में
आम्बूर–वाणियंबाडी क्षेत्र का चमड़ा निर्यात FY12 में ₹4,767 करोड़ था, जो भारत के कुल चमड़ा निर्यात का 20.5% था।
Tightly stitched — Outlook Business (State of Business 2013) · 2013आम्बूर–वाणियंबाडी–पालार घाटी चमड़ा क्लस्टर में 1,620 MSME और 18 बड़े उद्यम थे, जिनमें लगभग 1,40,000 मज़दूर काम करते थे (2012 MSME प्रोफ़ाइल)।
Tightly stitched — Outlook Business (State of Business 2013) · 2013ईस्ट इंडिया लेदर पंजीकृत GI है (आवेदन 95, प्रमाणपत्र 61)।
GI Registry — East India Leather, application 95
GI टैग
- East India Leatherआवेदन संख्या GI Application No. 95 (Certificate No. 61)GI Registry, Intellectual Property India — application 95
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- निर्यातकों के लिए जूते के अपर की सिलाई और पुर्ज़ों का जॉब-वर्क
- सोल, इनसोल, फ़ीते, चिपकने वाले पदार्थ और पैकेजिंग की आपूर्ति
- स्थानीय तैयार चमड़े से बैग, बेल्ट, बटुए जैसे सामान
- टेस्टिंग, अनुपालन और रसायन-प्रबंधन सेवाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- टैनरियों के लिए कड़े प्रदूषण नियंत्रण और शून्य तरल निकासी नियम
- ख़रीदारों का सिंथेटिक और बिना चमड़े के जूतों की ओर झुकाव
- यूरोप और अमेरिका में निर्यात माँग का उतार-चढ़ाव
- मज़दूरों की कमी और बढ़ता वेतन
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
जूते के ऊपरी हिस्से का तैयार चमड़ा (टैनरी) →चमड़े के जूते बनाना →जूते-चप्पल और चमड़ा सामान यूनिट →औद्योगिक चमड़े के हाथ के दस्ताने →चमड़े के बैग बनाना →चमड़े की कमर पेटी (बेल्ट) बनाना →अपहोल्स्ट्री चमड़ा टैनिंग यूनिट →
