कहानी
कोयंबटूर का इंजीनियरिंग आधार उसकी कपड़ा मिलों से निकला, जिन्हें मरम्मत की दुकानें, ढलाई कारखाने और मशीन बनाने वाले चाहिए थे। सूखे कोंगु क्षेत्र के किसानों को भूजल खींचने के लिए पंप चाहिए थे, और बीसवीं सदी की शुरुआत में स्थानीय वर्कशॉप उन्हें बनाने लगीं। यहाँ बड़े ब्रांड बने और उनके पीछे सैकड़ों छोटे निर्माता और आपूर्तिकर्ता आए। ढलाई, मशीनिंग, वाइंडिंग और पैनल बनाने वाली इकाइयाँ पास-पास हैं, इसलिए पूरा पंप लगभग स्थानीय पुर्ज़ों से बन जाता है।
आँकड़ों में
कोयंबटूर की 1,000 से अधिक MSME इकाइयाँ देश के 45% पंपसेट बनाती हैं।
Engineered for gains — Outlook Business (State of the Economy 2019) · 2019भारत की घरेलू और खेती के पंपसेट की लगभग 60% ज़रूरत कोयंबटूर में बनती है।
UGC-listed article on Coimbatore pump industry — Dr T.S. Kavitha, NGM College · 2021COINDIA पंप, मोटर और ढलाई उद्योग के लिए ₹60 करोड़ की क्लस्टर परियोजना है।
COINDIA sets up Rs 60 crore industrial infrastructure complex — Foundry Planet
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- पंप ब्रांडों के लिए मशीनिंग, वाइंडिंग या इम्पेलर ढलाई का जॉब-वर्क
- सोलर पंप और मोटर-स्टार्टर पैनल की असेंबली
- ग्रामीण ज़िलों में पंप सर्विसिंग, रीवाइंडिंग और पुर्ज़ों का व्यापार
- टेस्टिंग और ऊर्जा-दक्षता रेटिंग सेवाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- दूसरे राज्यों और आयात के सस्ते पंपों से दाम की होड़
- ताँबा, इस्पात और बिजली के बढ़ते दाम
- कुशल मशीनिस्ट और वाइंडर की कमी
- बड़े ख़रीदारों से देर से भुगतान
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
मोनोसेट पानी पंप बनाना →सबमर्सिबल पंप सेट निर्माण (खेती के लिए) →बिजली मोटर वाइंडिंग और रिवाइंडिंग की दुकान →मोटर स्टार्टर पैनल असेंबली →कूलर पंप निर्माण →डीज़ल इंजन और पंप सेट मरम्मत →अलौह धातु कास्टिंग फ़ाउंड्री (पीतल, काँसा, गन मेटल) →
