कहानी
शिवकाशी की सूखी, गर्म जलवायु और कम बारिश आतिशबाज़ी को धूप में धीरे सुखाने के लिए ठीक है। 1920 के दशक में दो स्थानीय भाइयों ने कलकत्ता में माचिस बनाना सीखा और घर लौटकर माचिस कारखाने लगाए; उसके बाद आतिशबाज़ी आई और कस्बा भारत के आतिशबाज़ी व्यापार का केंद्र बन गया। उत्पादन में मज़दूरी ज़्यादा लगती है और काम मौसमी है, जो दिवाली से पहले चरम पर होता है। हर कारखाने को पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) लाइसेंस देता है।
आँकड़ों में
शिवकाशी इलाक़े में 1,100 से अधिक पंजीकृत आतिशबाज़ी इकाइयाँ और कई हज़ार बिना लाइसेंस वाली इकाइयाँ हैं।
Sivakasi: Diwali will bring some respite but India's fireworks capital stares at a bleak future — South First · 2023कारखानों में 3,00,000 से अधिक मज़दूर काम करते हैं, और 5,00,000 और सहायक उद्योगों में।
Sivakasi: Diwali will bring some respite but India's fireworks capital stares at a bleak future — South First · 2023मशीनें न होने के कारण उत्पादन लागत का आधे से अधिक हिस्सा मज़दूरी है।
Sivakasi: Diwali will bring some respite but India's fireworks capital stares at a bleak future — South First · 2023भारत की 90% आतिशबाज़ी शिवकाशी में बनती है।
Challenges of firecracker industry — Shankar IAS Parliament
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- दिवाली से पहले लाइसेंसशुदा खुदरा और थोक आतिशबाज़ी व्यापार
- आतिशबाज़ी ब्रांडों के लिए पैकेजिंग, कार्टन और छपाई
- ग्रीन-पटाखा फ़ॉर्मूला और टेस्टिंग सेवा
- सुरक्षा प्रशिक्षण और अनुपालन सलाह
क्लस्टर की मुश्किलें
- कई शहरों में अदालती प्रतिबंध और बिक्री पर रोक
- कारखानों में बार-बार जानलेवा हादसे
- अवैध इकाइयाँ लाइसेंसधारी निर्माताओं से सस्ता बेचती हैं
- कम समय की मौसमी माँग
