कहानी
चंबा रुमाल चौकोर कपड़े होते हैं जिन पर दोहरी साटन टाँके से ऐसी कढ़ाई होती है कि चित्र दोनों ओर एक जैसा दिखे। यह कला 18वीं-19वीं सदी में चंबा के राजाओं के समय फली-फूली, जब पहाड़ी लघु चित्रकार रेखाएँ खींचते थे और दरबार की औरतें कढ़ाई करती थीं। शादियों और मंदिरों में उपहार और चढ़ावा ढकने के लिए रुमाल इस्तेमाल होते थे। आज कुछ महिला कारीगर प्रशिक्षण कार्यक्रमों और शिल्प मेलों की मदद से इस कला को ज़िंदा रखे हैं।
आँकड़ों में
चंबा रुमाल हिमाचल प्रदेश का पंजीकृत भौगोलिक संकेत (हस्तशिल्प) है।
IP India — Registration Details of Geographical Indications
GI टैग
- Chamba Rumalआवेदन संख्या GI Application No. 79IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Chamba Chappalआवेदन संख्या GI Application No. 614IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Chamba Metal Craftआवेदन संख्या GI Application No. 862IP India — Registration Details of Geographical Indications
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- GI-प्रामाणिक रुमाल और फ़्रेम किए नमूनों की ऑनलाइन बिक्री
- युवा कढ़ाई कारीगरों के लिए प्रशिक्षण केंद्र
- स्टोल और घर की सजावट के लिए डिज़ाइन साझेदारी
- चंबा शहर में शिल्प पर्यटन
क्लस्टर की मुश्किलें
- बहुत कम कुशल कारीगर
- धीमा, समय लेने वाला काम और कम मेहनताना
- सस्ती छपी हुई नकल
- दूर की जगह और कम ख़रीदार
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ज़री और सिल्क कढ़ाई →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →स्थानीय हस्तशिल्प और खिलौना बनाने का स्कूल →
