कहानी
कुल्लू घाटी के परिवार पीढ़ियों से गड्ढे वाले करघों पर ऊन बुनते आए हैं, अपने लिए सादी शॉल और पट्टू बनाते थे। 1940 के दशक में किन्नौर और बुशहर के ज्यामितीय किनारे वाले डिज़ाइन अपनाए गए और नमूनेदार कुल्लू शॉल पर्यटकों और मैदानों के ख़रीदारों का सामान बन गई। भुट्टिको जैसी बुनकर सहकारी समितियाँ इन शॉलों को देश भर के बाज़ारों तक ले गईं। अब मैदानों में बनी पावरलूम नकल हथकरघा बुनकरों को सस्ते में पछाड़ती है।
आँकड़ों में
कुल्लू शॉल क्लस्टर का सालाना कारोबार ₹40 करोड़ है।
Fibre2Fashion — Kullu cluster: synonym of handwoven shawl
GI टैग
- Kullu Shawlआवेदन संख्या GI Application No. 19IP India — Registration Details of Geographical Indications
- Kullu Shawl (Logo)आवेदन संख्या GI Application No. 383IP India — Registration Details of Geographical Indications
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- GI वाली हथकरघा शॉल की ऑनलाइन बिक्री
- बुनकरों को धागे की रंगाई और आपूर्ति
- आधुनिक स्टोल और घर के कपड़ों के लिए डिज़ाइन साझेदारी
- शिल्प पर्यटन — पर्यटकों के लिए बुनाई का प्रदर्शन
क्लस्टर की मुश्किलें
- पावरलूम नकल को कुल्लू शॉल बताकर बेचना
- युवाओं का बुनाई छोड़ना
- ऊन और धागे की लागत
- पर्यटन से जुड़ी मौसमी माँग
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
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