कहानी
19वीं सदी के मध्य में कांगड़ा घाटी में चाय लगाई गई, और 1800 के दशक के आख़िर तक कांगड़ा चाय ने लंदन और एम्स्टर्डम में पदक जीते। 1905 के कांगड़ा भूकंप और बाद में भूमि सुधारों में बागानों के छिनने से उद्योग सिकुड़ गया। ज़्यादातर बागान पालमपुर के आसपास हैं, जहाँ छोटे उत्पादक, कुछ एस्टेट और सहकारी कारख़ाने हैं। कांगड़ा चाय अपने हल्के, फलों जैसे स्वाद और हरी चाय की परंपरा के लिए जानी जाती है।
आँकड़ों में
काग़ज़ों में कांगड़ा में चाय का कुल रकबा 2,060 हेक्टेयर है, और कुल उत्पादन 13 लाख किलो तैयार चाय।
The Tribune — Himachal special coverage, 25 July 2012 · 2012कम से कम 80% बागान पालमपुर के आसपास थे।
NABARD — Model bank project: Tea plantation for small tea growers in Himachal Pradesh
GI टैग
- Kangra Teaआवेदन संख्या GI Application No. 25IP India — Registration Details of Geographical Indications
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- ऑनलाइन और उपहार बाज़ार के लिए ब्रांडेड कांगड़ा हरी चाय
- पालमपुर और धर्मशाला के पास चाय पर्यटन और एस्टेट में ठहरना
- उत्पादकों की पत्ती के लिए छोटी प्रोसेसिंग इकाइयाँ
- कांगड़ा चाय में हिमालयी जड़ी-बूटियाँ मिलाना
क्लस्टर की मुश्किलें
- चाय का घटता रकबा
- कम उपज और पुरानी झाड़ियाँ
- सूखा और जलवायु परिवर्तन
- पत्ती तोड़ने की मज़दूरी
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ग्रीन टी प्रसंस्करण इकाई →चाय ब्लेंडिंग और पैकिंग इकाई →जैविक ग्रीन और हर्बल चाय की खेती →कैमोमाइल चाय प्रसंस्करण →
