कहानी
1916 में सैमुअल इवांस स्टोक्स के कोटगढ़ में अमेरिकी डिलीशियस किस्में लाने के बाद शिमला में सेब की खेती तेज़ी से बढ़ी। अगले दशकों में बागान ऊपरी शिमला की पहाड़ियों में फैले और सेब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया। फल पेटियों में भरकर दिल्ली की आज़ादपुर और दूसरी मंडियों में भेजा जाता है, और अब फ़सल का कुछ हिस्सा CA भंडारों में रखा जाता है। मौसम, आयात और पैकिंग नियम हर साल बागवानों की कमाई तय करते हैं।
आँकड़ों में
2017-18 में शिमला ज़िले में सेब उत्पादन 2,51,897 मीट्रिक टन रहा, जो हिमाचल के सभी 12 ज़िलों में सबसे ज़्यादा था।
Agricultural Science Digest — apple production in Himachal Pradesh (citing HP Economic Survey 2018-19) · 2020हिमाचल प्रदेश औसतन हर साल लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा करता है, और सेब अर्थव्यवस्था राज्य को हर साल ₹5,500 करोड़ से ज़्यादा देती है।
The Tribune — CM: Parala unit will be a boon for apple growers
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- बागवानों के लिए श्रेणी, पैकिंग और कोल्ड-स्टोरेज सेवा
- सेब प्रसंस्करण — जूस, साइडर, सिरका, सूखे टुकड़े
- सघन बागानों के लिए नर्सरी पौधे
- मैदानों की मंडियों तक ढुलाई और आढ़त सेवा
क्लस्टर की मुश्किलें
- मौसम के झटके — ओले, सूखा, बेमौसम बर्फ़
- आयातित सेब से मुकाबला
- पैकिंग और ढुलाई का ऊँचा ख़र्च
- पुराने बागान और जलवायु के साथ ऊँचाई की ओर खिसकती खेती
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
सूखे सेब के टुकड़े (डिहाइड्रेटेड सेब) →बिना अल्कोहल वाला सेब साइडर →प्राकृतिक फल सिरका →मिक्स फलों का जूस और स्क्वैश यूनिट →कोल्ड स्टोरेज (आलू, 2000 टन) →पौध नर्सरी (फल / सजावटी) →मोल्डेड पल्प पैकिंग (अंडे और फल की ट्रे) →
