कहानी
शिवकाशी में छपाई कस्बे की माचिस और आतिशबाज़ी के डिब्बों के लेबल के लिए शुरू हुई। 1947 में ऑफ़सेट छपाई आई और जल्द ही यहाँ के प्रिंटर पूरे भारत के लिए कैलेंडर, डायरी और व्यावसायिक काम करने लगे। जुलाई से नवंबर तक का समय सबसे व्यस्त होता है, जब नए साल के कैलेंडर और डायरी छपती हैं। कई इकाइयाँ अब पैकेजिंग और कार्टन की ओर बढ़ गई हैं।
आँकड़ों में
शिवकाशी छपाई केंद्र में 750 इकाइयों में लगभग 50,000 लोग काम करते थे और सालाना कारोबार लगभग ₹1,500 करोड़ था (2013)।
The Rs 1,500 cr Sivakasi print market bounces back — PrintWeek India · 20131947 में कलियप्पा नाडार ने शिवकाशी में ऑफ़सेट छपाई शुरू की।
Four print CEOs hold up a mirror to Sivakasi — PrintWeek Indiaप्रिंटिंग क्लस्टर, शिवकाशी का साझा सुविधा केंद्र MSE-CDP के तहत पूरा हुआ बताया गया है।
Completed Common Facility Centres under MSE-CDP (as on 22 Mar 2024), Office of DC-MSME · 2024
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- FMCG और दवा कंपनियों के लिए पैकेजिंग और मोनो-कार्टन छपाई
- छपाई के बाद का जॉब-वर्क: लैमिनेशन, डाई-कटिंग, बाइंडिंग
- ऑनलाइन बिकने वाली कस्टम कॉरपोरेट डायरी और कैलेंडर
- प्री-प्रेस और डिज़ाइन सेवाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- छपे कैलेंडर और डायरी की घटती माँग
- काग़ज़ के दामों में उतार-चढ़ाव
- बिजली का ख़र्च और मौसमी मज़दूर
- शहरों में डिजिटल छपाई से मुक़ाबला
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ऑफ़सेट प्रिंटिंग इकाई →कॉपी (नोटबुक) बनाने की इकाई →छपाई की स्याही (प्रिंटिंग इंक) →लचीली पैकिंग पर रोटोग्रेव्योर छपाई →कंप्यूटर स्टेशनरी (लगातार काग़ज़) →
