कहानी
गद्वाल की बुनाई गद्वाल के शासकों के संरक्षण में बढ़ी, जो कुशल बुनकरों को शहर में लाए। इन साड़ियों में सूती बदन को रेशमी किनारी और पल्लू से कुपडम या कुम्बम तकनीक से जोड़ा जाता है, जिससे साड़ी हल्की रहती है पर भव्य दिखती है। ये पारंपरिक रूप से शादी और मंदिर में पहनी जाती हैं। गद्वाल साड़ियों को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Gadwal Sareesआवेदन संख्या GI application no. 137Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- साड़ियों की सीधी ऑनलाइन बिक्री
- रेशम और ज़री धागे की सप्लाई
- दुल्हन की साड़ी को पसंद के अनुसार बनाने की सेवा
क्लस्टर की मुश्किलें
- पावरलूम नक़ल
- रेशम और ज़री के बढ़ते दाम
- बुनकरों का दूसरे काम में जाना
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
साड़ी रोलिंग और पॉलिशिंग →ज़री और सिल्क कढ़ाई →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
