कहानी
कहा जाता है कि नारायणपेट की बुनाई सत्रहवीं सदी में शुरू हुई, जब मराठा अभियानों के दौरान महाराष्ट्र के बुनकर यहाँ बसे। इन साड़ियों में चारख़ाने वाला बदन, मंदिर के नमूनों वाली विपरीत रंग की किनारी और अलग तरह का पल्लू होता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के पास होने से ये तीनों राज्यों में ख़ूब बिकती हैं। नारायणपेट हथकरघा साड़ियों को जीआई टैग मिला है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Narayanpet Handloom Sareesआवेदन संख्या GI application no. 214Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- जीआई साड़ियों की ऑनलाइन और प्रदर्शनी बिक्री
- नारायणपेट बुनाई से ड्रेस मटीरियल और स्टोल
- रंगे धागे की सप्लाई
क्लस्टर की मुश्किलें
- पावरलूम नक़ल
- बुनकरों की कम कमाई
- डिज़ाइन में सीमित मदद
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
साड़ी रोलिंग और पॉलिशिंग →सूती धागे की रंगाई (लच्छी और पैकेज रंगाई) →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
