कहानी
पोचमपल्ली और कोयलगुडेम, पुट्टपाका जैसे आसपास के गाँव इकत बुनते हैं, जिसमें बुनाई से पहले ही धागे को नमूने के अनुसार बाँधकर रँगा जाता है। यह कला इलाक़े की पुरानी तेलिया रुमाल परंपरा से निकली। आचार्य विनोबा भावे ने 1951 में भूदान आंदोलन यहीं से शुरू किया था, इसलिए गाँव का पूरा नाम भूदान पोचमपल्ली पड़ा। पोचमपल्ली इकत 2004-05 में भारत के जीआई क़ानून के तहत पंजीकृत होने वाले शुरुआती उत्पादों में से था।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Pochampalli Ikatआवेदन संख्या GI application no. 4Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
- Pochampally Ikat (Logo)आवेदन संख्या GI application no. 562Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
- Telia Rumalआवेदन संख्या GI application no. 599Registration details of Geographical Indications (IP India GI Registry)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- इकत साड़ियाँ और कपड़ा ऑनलाइन और बुटीक को बेचें
- इकत से घरेलू कपड़े और परिधान
- धागा बाँधने और रँगने का जॉब-वर्क
- हथकरघा पर्यटन और बुनाई कार्यशालाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- छपे हुए नकली इकत
- धागे की बढ़ती क़ीमत
- बुनकरों का दूसरे काम में जाना
- बिचौलियों का मुनाफ़ा
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
सूती धागे की रंगाई (लच्छी और पैकेज रंगाई) →साड़ी रंगाई और छपाई →कपड़े के मेड-अप्स (नैपकिन, मैट, एप्रन) →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
