कहानी
1960 के दशक में हैदराबाद में लगे सरकारी इंडियन ड्रग्स एंड फ़ार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (IDPL) संयंत्र ने उन रसायनज्ञों को प्रशिक्षित किया जिन्होंने बाद में डॉ. रेड्डीज़ जैसी कंपनियाँ बनाईं। बल्क ड्रग इकाइयाँ पटनचेरु, बोल्लारम और जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्रों में जमा हुईं। 1999 से भारत का पहला संगठित जीवन विज्ञान क्लस्टर जीनोम वैली बना, जहाँ भारत बायोटेक जैसी टीका और बायोटेक कंपनियाँ आईं। आज तेलंगाना देश के सबसे बड़े दवा निर्यातक राज्यों में है।
आँकड़ों में
वित्त वर्ष 2026 में तेलंगाना से दवा निर्यात ₹49,275 करोड़ रहा; भारत के कुल दवा निर्यात में हैदराबाद का हिस्सा लगभग 20% है।
Telangana: state profile (IBEF) · 2026जीनोम वैली में 18 देशों की 200 से अधिक कंपनियाँ हैं, जिनमें लगभग 25,000 लोग काम करते हैं (2025)।
Genome Valley, Hyderabad: a global biopharma scale-up hub (Labiotech.eu) · 2025
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- एपीआई निर्माताओं को सॉल्वेंट, इंटरमीडिएट और एक्सिपिएंट सप्लाई करें
- अपशिष्ट जल शोधन और सॉल्वेंट रिकवरी सेवा
- अनुबंध जाँच और नियामक दस्तावेज़ सेवा
- लैब उपकरण सर्विसिंग और कैलिब्रेशन
क्लस्टर की मुश्किलें
- पटनचेरु के आसपास भूजल प्रदूषण के बाद कड़े नियम
- चीन से आने वाले मुख्य कच्चे रसायनों पर निर्भरता
- अमेरिकी एफ़डीए निरीक्षण का जोखिम
- जेनेरिक बाज़ार में दामों का दबाव
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
मैग्नीशियम स्टीयरेट →जड़ी-बूटी अर्क (एक्सट्रैक्ट) इकाई →दवा की दुकान (मेडिकल स्टोर) →
