कहानी
कांचीपुरम की रेशम बुनाई यहाँ के मंदिरों से जुड़ी है, और देवांग व सालिया समुदाय के बुनकर परिवार सदियों पहले यहाँ बसे। साड़ियाँ भारी शहतूत रेशम और सोने या चाँदी की ज़री से बुनी जाती हैं, और बॉर्डर को 'कोरवई' तकनीक से जोड़ा जाता है। बुनकरों ने 1949 से सहकारी समितियाँ बनाईं, और कई को-ऑप्टेक्स और निजी शोरूम से बेचते हैं। कांचीपुरम सिल्क भारत के पहले पंजीकृत GI उत्पादों में है।
आँकड़ों में
बुनकरों की पहली सहकारी समिति 1949 में बनी; कामाक्षी अम्मन समिति 79 बुनकरों से शुरू हुई और अब उसके लगभग 2,000 सदस्य हैं।
GI tag product — Kancheevaram silks and sarees, Kancheepuram district administrationलगभग 24 सहकारी समितियाँ हैं, और लगभग 50,000 बुनकर विभिन्न सहकारी समितियों के ज़रिए काम करते हैं।
GI tag product — Kancheevaram silks and sarees, Kancheepuram district administrationशहर का सालाना कारोबार ₹200 करोड़ से अधिक है, और निर्यात लगभग ₹3 करोड़।
GI tag product — Kancheevaram silks and sarees, Kancheepuram district administrationकांचीपुरम सिल्क पंजीकृत GI है (आवेदन 15, प्रमाणपत्र 6)।
GI Registry — Kancheepuram Silk, application 15
GI टैग
- Kancheepuram Silkआवेदन संख्या GI Application No. 15 (Certificate No. 6)GI Registry, Intellectual Property India — application 15
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- सिल्क मार्क वाली असली GI साड़ियों की ऑनलाइन बिक्री
- बुनकरों के लिए ज़री, धागा बटाई और रंगाई सेवा
- साड़ी फ़िनिशिंग, रोलिंग और पॉलिशिंग
- डिज़ाइन सेवा और जैक्वार्ड कार्ड पंचिंग
क्लस्टर की मुश्किलें
- पावरलूम और नक़ली ज़री की साड़ियाँ कांचीपुरम के नाम पर बिकती हैं
- रेशम और सोने के बढ़ते दाम
- युवा बुनाई छोड़ रहे हैं
- मज़दूरी पर काम करने वाले बुनकरों का कम वेतन
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
ज़री और सिल्क कढ़ाई →साड़ी रोलिंग और पॉलिशिंग →साड़ी रंगाई और छपाई →हथकरघा और हस्तशिल्प की दुकान →
