कहानी
मेदिनीपुर के निचले खेतों में मादुरकाठी घास उगती है, और परिवार पीढ़ियों से इससे चटाइयाँ बुनते आए हैं। सबसे महीन किस्म मसलंद कभी राजघरानों के लिए बनाई जाती थी। आज यह शिल्प GI पंजीकृत है, और बुनकर इसी घास से टेबल मैट, बैग और सजावटी सामान भी बनाते हैं।
आँकड़ों में
लगभग 1 लाख किसान परिवार मादुरकाठी की खेती और बुनाई में लगे हैं, और मेदिनीपुर के 11 ब्लॉकों में 4,432 कारीगर आधिकारिक रूप से मादुर बुनकर के रूप में पंजीकृत हैं।
From Terracotta to Textiles: GST Reforms to Empower Bengal's Industries (PIB factsheet) · 2025
GI टैग
- Madur Kathiआवेदन संख्या Application No. 567Registration details of Geographical Indications (state-wise register), IP India
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- शहरी ख़रीदारों के लिए मादुर टेबल लिनन और सजावटी सामान डिज़ाइन करके बेचें
- होटलों और रिसॉर्ट को थोक में चटाइयाँ
- प्राकृतिक रंगाई और फ़िनिशिंग सेवाएँ
क्लस्टर की मुश्किलें
- सादी चटाइयों के कम दाम
- प्लास्टिक चटाइयों से मुकाबला
- मौसम से घास की फ़सल को नुकसान
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
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