कहानी
मंदिर आभूषण दक्षिण भारत के मंदिरों में देवताओं के लिए बनने वाले गहनों से शुरू हुए। नागरकोइल के पास वडसेरी के सुनार परिवार इस शैली में माहिर हैं, जिसमें चाँदी पर सोने की परत और लाल व हरे केम्प पत्थर लगते हैं। शास्त्रीय नर्तक मुख्य ख़रीदार बने, फिर दुल्हनें। नागरकोइल के मंदिर आभूषण को GI टैग मिला है।
आँकड़ों में
टेम्पल ज्वेलरी ऑफ़ नागरकोइल पंजीकृत GI है (आवेदन 65, प्रमाणपत्र 39)।
GI Registry — Temple Jewellery of Nagercoil, application 65
GI टैग
- Temple Jewellery of Nagercoilआवेदन संख्या GI Application No. 65 (Certificate No. 39)GI Registry, Intellectual Property India — application 65
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- भारत और विदेश के नृत्य विद्यालयों को नृत्य आभूषण सेट की ऑनलाइन बिक्री
- प्रस्तुतियों और शादियों के लिए मंदिर आभूषण किराए पर
- सोने की परत और केम्प जड़ाई का जॉब-वर्क
- डिज़ाइनरों के साथ दुल्हन के गहनों पर काम
क्लस्टर की मुश्किलें
- दूसरे केंद्रों के सस्ते नक़ली सेट
- सोने-चाँदी के दामों में उतार-चढ़ाव
- कम युवा सुनार
- बाज़ार तक सीमित पहुँच
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
हस्तशिल्प आभूषण इकाई →चश्मे के फ़्रेम और आभूषणों पर सोने की परत (जॉब वर्क) →कृत्रिम (आर्टिफ़िशियल) गहनों की दुकान →
