कहानी
छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का 'धान का कटोरा' कहा जाता है, और रायपुर इसके धान क्षेत्र के बीच है। सैकड़ों चावल मिलें राज्य द्वारा ख़रीदा गया धान कूटकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली और व्यापारियों को चावल देती हैं। चावल राज्य का मुख्य निर्यात है, और अब फ़ोर्टिफ़ाइड चावल दानों का निर्यात भी शुरू हुआ है। जीराफूल और नगरी दुबराज जैसी सुगंधित क़िस्मों को GI मिला है।
आँकड़ों में
2025-26 में छत्तीसगढ़ के ₹16,510 करोड़ के वस्तु निर्यात में चावल, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मसाले मुख्य थे।
Chhattisgarh: State Economy and Industries (IBEF) · 2026नवंबर 2025 में APEDA की मदद से छत्तीसगढ़ से 12 टन फ़ोर्टिफ़ाइड चावल दानों का पहला निर्यात कोस्टा रिका को हुआ।
Chhattisgarh: State Economy and Industries (IBEF) · 2026जीराफूल चावल 2018-19 में (आवेदन 611) और नगरी दुबराज 2022-23 में (आवेदन 669) GI के रूप में पंजीकृत हुए।
Registration Details of Geographical Indications (GI Registry, IP India) · 2026
GI टैग
- Jeeraphoolआवेदन संख्या GI Application No. 611Registration Details of Geographical Indications (GI Registry, IP India)
- Nagri Dubrajआवेदन संख्या GI Application No. 669Registration Details of Geographical Indications (GI Registry, IP India)
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- सरकारी योजनाओं के लिए फ़ोर्टिफ़ाइड चावल दानों की ब्लेंडिंग
- राइस ब्रान तेल और चावल से बने स्नैक्स
- GI क़िस्मों का ब्रांडेड सुगंधित चावल
- भूसी से बिजली और पार्टिकल बोर्ड
क्लस्टर की मुश्किलें
- सरकारी कस्टम मिलिंग पर निर्भरता
- बिजली और मज़दूरी की लागत
- निर्यात के गुणवत्ता मानक
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
राइस मिल (मिनी) →चिवड़ा / पोहा बनाना →मुरमुरा (मुरी/लाई) यूनिट →धान की भूसी का पार्टिकल बोर्ड →फ्रायम्स (चावल के पापड़/वेफ़र) →पहाड़ी लाल चावल प्रोसेसिंग और पैकिंग →
